| 1219 | Ein buoch saget uns sus: |
| 1220 | daz rîche besaz Faustinjânus. |
| 1221 | Claudîus hiez sîn pruoder, |
| 1222 | er tet im lait genuogez. |
| 1223 | Faustinjânus nam ain wîp, |
| 1224 | diu was im sam der lîp: |
| 1225 | Mähthilt hiez diu frowe, |
| 1226 | si leist im grôze triwe. |
| 1227 | si was ze manigen tugenden rekorn, |
| 1228 | ouh was diu frouwe geborn |
| 1229 | von kaiserlîchem kunne. |
| 1230 | si hêten grôze wunne |
| 1231 | mit ir beider lîbe. |
| 1232 | owol der wîle |
| 1233 | daz si ie in dise werlt geborn wart! |
| 1234 | waz si gote wuochers hât brâht! |
| 1235 | Duo stuont iz unlange |
| 1236 | unz diu muoter mit kinde wart bevangen. |
| 1237 | zwaier sun si ensant genas: |
| 1238 | owî wi frô des der vater was! |
| 1239 | ainer wart gehaizen Faustînus, |
| 1240 | der ander Faustus. |
| 1241 | duo wuohsen diu chindelîn, |
| 1242 | alle Rômære |
| 1243 | ir iegelîch fur den anderen, |
| 1244 | wi si diu kint mahten gehalten |
| 1245 | al nâh der friunt êre. |
| 1246 | si wâren di aller tûrsten hêrren, |
| 1247 | des hôhisten geslehtes |
| 1248 | daz ze Rôme sîn mahte. |
| 1249 | si liten in der chintheit |
| 1250 | manige nôt unt arbeit, |
| 1251 | di si wol uberwunden sît. |
| 1252 | si verdienten den êwigen |
| 1253 | Einen bruoder habete der hêrre, |
| 1254 | der muote di frowen sêre, |
| 1255 | gehaizen was er Claudîus. |
| 1256 | der tievel |
| 1257 | ze der kuniginne er gie, |
| 1258 | mit den armen er si umbevie. |
| 1259 | er dructe si an sîn bruste, |
| 1260 | sîner bôsen geluste |
| 1261 | brâht er si innen, |
| 1262 | er sprach, daz er si gerne wolte minnen, |
| 1263 | er nemahte si iz niht langer verhelen, |
| 1264 | er muose Note: anm. daz leben, |
| 1265 | im wêre gereit der tôt, |
| 1266 | si nehulf im ûz der nôt. |
| 1267 | sîn |
| 1268 | daz begunde der frowen harte |
| 1269 | Diu frowe sprach im duo zuo: |
| 1270 | ih sage dir, hêrre, wie dû tuo: |
| 1271 | relâ mih sô getâner worte, |
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| 1272 | mih dwinget grôziu vorhte. |
| 1273 | vil liep ist mir mîn man, |
| 1274 | die rede lâ dû alzoges stân. |
| 1275 | si enist dir nehain guot. |
| 1276 | zu dir nehân ih nehainen muot, |
| 1277 | ih nesol mih niht an dih wenden |
| 1278 | noh mîn edele kunne niht gescenden. |
| 1279 | unt vreiscet ez mîn hêrre, |
| 1280 | er |
| 1281 | Der hêrre sprach, daz er sîn niht |
| 1282 | ob er dar umbe sterben solte, |
| 1283 | oder swaz sîn wurde, |
| 1284 | er truoge sô getâne burde, |
| 1285 | er nemahte mit nihte |
| 1286 | er begie sô grôz |
| 1287 | nâh der frowen minne, |
| 1288 | daz er gezwîvelte ain tail an sînem sinne. |
| 1289 | Duo nam ir diu frowe guot |
| 1290 | ein vil tugentlîchen muot, |
| 1291 | daz si nie niemen sagete |
| 1292 | die nôt di si von im habete. |
| 1293 | under wîlen si im drôte, |
| 1294 | vil dike si in |
| 1295 | si sprach: ‘vreiscent iz unser mâge, |
| 1296 | des lebens werden wir âne’ |
| 1297 | und ander Rômære. |
| 1298 | iz wirt in vil swære. |
| 1299 | si heizent uns lîhte stainen’. |
| 1300 | si begunde haize wainen. |
| 1301 | Iedannoh newolte sih der hêrre |
| 1302 | der rede niht |
| 1303 | si sprach: ‘ |
| 1304 | nû tuo als ih dir râte. |
| 1305 | warte dû der zîte, |
| 1306 | sô der wirt gerîte. |
| 1307 | unt hie ze hove werde stille, |
| 1308 | ih hân zu dir guoten willen. |
| 1309 | daz gestêt ouh unlange: |
| 1310 | mit chinde bin ih nû bevangen, |
| 1311 | sîn nemac ze disen zîten niht sîn. |
| 1312 | vil lieber |
| 1313 | gib mir guotlîche ain frist, |
| 1314 | ih laiste gerne al daz dir liep ist’. |
| 1315 | Der hêrre gewerte si der bete, |
| 1316 | sîn gemuote stilte dâ ze stete. |
| 1317 | diu frouwe gedâhte maniger liste: |
| 1318 | wie si ir êre |
| 1319 | wie si den |
| 1320 | von der rede mähte bringen. |
| 1321 | duo si des kindelînes genas |
| 1322 | |
| 1323 | des gefroweten sih zewâre |
| 1324 | friunt unde mâge. |
| 1325 | si vunden im den aller scônisten namen |
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| 1326 | dannen si ie gehôrten sagen: |
| 1327 | er wart geheizen Clêmens, |
| 1328 | sît wart er ze Rôme bâbes; |
| 1329 | er ist ain marterære hêre, |
| 1330 | er sol uns |
| 1331 | Do diu frouwe kom wider zu ir craft |
| 1332 | unt si des nahtes bî dem chunige gelac, |
| 1333 | alse der hêrre enslief, |
| 1334 | wie lûte in diu frouwe an rief: |
| 1335 | ‘hilf dû mir, hêrre, |
| 1336 | ê ih |
| 1337 | der chunich harte erscrihte, |
| 1338 | er spranc ûf in |
| 1339 | er sprach: ‘elliu mîn wunne, |
| 1340 | daz mir dîn got gunne! |
| 1341 | waz ist dir gescehen? |
| 1342 | gerner verwandelt ih daz leben, |
| 1343 | ê dir iemer iht ze laide gescêhe. |
| 1344 | waz ist daz dû in dînem troume sêhe?’ |
| 1345 | Diu frouwe antwurte im dô, |
| 1346 | si sprach: ‘hêrre, ih enmac niemer werden frô. |
| 1347 | ih hân sô getâniu dinc gesehen, |
| 1348 | ih enmac niht lange leben. |
| 1349 | ouh sagen ih dir vur wâr: |
| 1350 | unser kint gelebent niemer ain jâr, |
| 1351 | du nehaizes si diu buoch lêren’. |
| 1352 | wol trôste si der hêrre. |
| 1353 | ‘liebe’ sprach er, ‘dîn troum regê dir ze haile! |
| 1354 | nu underwint dih der kinde baider |
| 1355 | unt |
| 1356 | wâ die guoten maister sîn, |
| 1357 | |
| 1358 | dâ die aller wîsten sint. |
| 1359 | si |
| 1360 | ih versihe mih aller êren dar zuo, |
| 1361 | si werdent uns ze |
| 1362 | ich enclage niht wan dîn arbait; |
| 1363 | dînes râtes volge ih gerne’, |
| 1364 | sprach der tûrlîche hêrre. |
| 1365 | Diu frowe hiez diu scef zieren, |
| 1366 | beraiten vil sciere, |
| 1367 | duo ez allez gar was, |
| 1368 | die liute hôrten sagen daz, |
| 1369 | daz man wolte versenten |
| 1370 | verre in ellende |
| 1371 | die junchêrren baide, |
| 1372 | si begunden haize wainen. |
| 1373 | di sîne vordersten man |
| 1374 | di wolten ez gerne |
| 1375 | duo sprach der chuninc hêre: |
| 1376 | ‘nû vernemet mîn lêre: |
| 1377 | swer dem besem |
| 1378 | den sun hazzet unt nîdet. |
| 1379 | zuht unt vorhte ist guot, |
| 1380 | swer aver des niht entuot, |
| Page 107 |
| 1381 | daz er in |
| 1382 | der ziuhet aller dichest den zagen. |
| 1383 | swenner kumet ze den wizzen, |
| 1384 | daz er daz erbe sol besizzen, |
| 1385 | so nekan er ze |
| 1386 | tuon noh verlâzen, |
| 1387 | so vertreit in sîn chintheit |
| 1388 | dike in grôz arbeit, |
| 1389 | unt kan die selbe niht getragen. |
| 1390 | jâ hôrt ich mînen vater sagen, |
| 1391 | daz der sun und der chneht |
| 1392 | haben algelîche ain reht. |
| 1393 | swenn er |
| 1394 | daz erbe besizzet er danne. |
| 1395 | hât er danne wîstuom |
| 1396 | der lêrt in êre unde frum. |
| 1397 | mîniu chint muozen werden bedwungen |
| 1398 | mit froste joh mit hunger, |
| 1399 | mit nôte unt mit arbeit |
| 1400 | uberwindent si die kintheit. |
| 1401 | der wîstuom êret wol daz rîche. |
| 1402 | sô megen si vrôlîche |
| 1403 | leben iemer mit êren’. |
| 1404 | duo sprâchen alle di hêrren, |
| 1405 | daz iz ir wille wêre, |
| 1406 | nû iz im wol gezême. |
| 1407 | Duo iz allez gerait wart, |
| 1408 | diu kint huoben sih an die vart |
| 1409 | ûf daz mer vil brait. |
| 1410 | si chômen in grôz arbait: |
| 1411 | der mastpoum |
| 1412 | die |
| 1413 | dô kômen grôze winde, |
| 1414 | daz scef sanc ze grunde. |
| 1415 | da ertranc al daz dar an was. |
| 1416 | daz dâ nihtes niht genas |
| 1417 | wan di junchêrren baide. |
| 1418 | daz gap in got ze haile: |
| 1419 | die unden sluogen si an ain |
| 1420 | dâ si ain viskêre vant. |
| 1421 | der zôh si mit ainem nezze ûz, |
| 1422 | er vuorte si haim in sîn hûs. |
| 1423 | diu kint sih berieten, |
| 1424 | daz si niemen sageten, |
| 1425 | wannen si komen wæren. |
| 1426 | des nam si grôz |
| 1427 | alse listiclîche redeten si dâ: |
| 1428 | der ain solt haizen Nicêtâ, |
| 1429 | der ander solte haizen Aquilâ. |
| 1430 | Duo geviel iz an ain tac: |
| 1431 | ain grôz |
| 1432 | der viskêre nam diu kint bî der hant, |
| 1433 | zu ainem steken er si bant, |
| 1434 | er bôt si dâ veile. |
| 1435 | alle die gemeine |
| 1436 | die in der bure wâren |
| 1437 | die îlten dar gâhen, |
| 1438 | daz si si gesæhen. |
| 1439 | si wunderte harte, wannen si komen wæren, |
| 1440 | oder wannen si wæren geborn: |
| 1441 | daz enmahte niemen ûzer in revarn. |
| Page 108 |
| 1442 | In der selben burc was dâ |
| 1443 | quedam matrona, |
| 1444 | der was ir einiger sun tôt. |
| 1445 | dannen hête si michel clage unt nôt. |
| 1446 | der sagete man ze mære, |
| 1447 | daz an dem market vaile wæren |
| 1448 | diu aller scônisten kindelîn |
| 1449 | diu in der werlte mahten sîn. |
| 1450 | si koufte di junchêrren |
| 1451 | durh willen ir sunes sêle, |
| 1452 | si legete si an wât wîzze, |
| 1453 | si zôh si mit michelem flîzze. |
| 1454 | Diu frouwe |
| 1455 | sam si ir sune solten sîn. |
| 1456 | ‘muoter’ sprâchen si ir zuo, |
| 1457 | si trûtte si spâte unt fruo |
| 1458 | sam si si under ir brusten hête getragen. |
| 1459 | den einen si sunterlîche nam, |
| 1460 | alsô verre si in beswuor, |
| 1461 | unz si ain tail ûz im ervuor. |
| 1462 | si wunscte ir ze kinden, |
| 1463 | ir erbes hiez si si sih |
| 1464 | als noh der sit ze Chriechen ist. |
| 1465 | ‘muoter, nehein lange frist’, |
| 1466 | sprâchen diu |
| 1467 | ‘nemegen wir sô frî sîn. |
| 1468 | dû hâst selbe wol vernomen: |
| 1469 | wir birn durh diu buoch ûz komen’. |
| 1470 | Diu muoter wart vil frô, |
| 1471 | si sante si dem hêrren Zachêo, |
| 1472 | want er der Zachêus was |
| 1473 | den unser hêrre ûf dem boume sprach, |
| 1474 | sancte Pêter der gotes wîgant |
| 1475 | hêt in dar gesant |
| 1476 | der christenheit ze trôste. |
| 1477 | dâ rihte er ain chlôster |
| 1478 | dem hailigen geiste ze êren. |
| 1479 | dâ wâren drîzec hêrren, |
| 1480 | der bruoder newart nie minre noh mêre. |
| 1481 | dâ lêrte man diu kint hêre. |
| 1482 | Do di boten niene kômen |
| 1483 | wider hin ze Rôme |
| 1484 | unt diu muoter lange |
| 1485 | si rechom vil harte. |
| 1486 | si gestuont dike aine, |
| 1487 | si begunde haize wainen, |
| 1488 | si clagete vil sêre, |
| 1489 | si sprach: ‘mîn vil lieber hêrre, |
| 1490 | mîn leben daz entouc, |
| 1491 | du negebes mir urloup |
| 1492 | lâ mih selbe sehen, |
| 1493 | ob mîniu kint in der werlte iender leben’. |
| 1494 | der chunic |
| 1495 | er sprach: ‘frowe, wi redestû sô? |
| 1496 | ih hân vil manigen man, |
| 1497 | die mir wol kunnen |
| 1498 | wâ si sint |
| 1499 | du nesolt dih niht schenden |
| 1500 | noh dîn edel kunne. |
| 1501 | ja nehân ih trôst noh wunne |
| Page 109 |
| 1502 | wan dîn aine. |
| 1503 | swaz mir ze laide |
| 1504 | an den kinden ist gescehen, |
| 1505 | daz muoz alsô wesen. |
| 1506 | gescêhe dir dehein nôt, |
| 1507 | sô wære mir |
| 1508 | zewâre nesolt ih dih niht haben, |
| 1509 | man muose mih in di erde begraben’. |
| 1510 | ‘Alsô dû, hêrre, gebiutest’, sprach diu chunigîn, |
| 1511 | ‘sô muoz ez von rehte sîn. |
| 1512 | owê mir |
| 1513 | nu gedenche ih niemer mêr ze lîbe, |
| 1514 | mir ist der lîp |
| 1515 | owê Rômâre, |
| 1516 | zewiu lât ir mih leben? |
| 1517 | mir ist sô laide gescehen, |
| 1518 | ih nemach ez laider nû niht langer vertragen. |
| 1519 | hêrre, |
| 1520 | si sluoc ze den prusten, |
| 1521 | den purpur alsô veste |
| 1522 | den zarte si von ainander. |
| 1523 | daz hâr mit den handen |
| 1524 | ûz der |
| 1525 | daz wort si dike dar nâh sprach: |
| 1526 | ‘owê daz ich ie in dise werlt kint getruoc!’ |
| 1527 | ir |
| 1528 | Der kunic trûriclîche sprach: |
| 1529 | ‘frowe, ja nemac ih dîn ungemach |
| 1530 | niht langer sô gesehen. |
| 1531 | nû mir laide sule gescehen |
| 1532 | unt dû gerne welles wallen, |
| 1533 | nû wel dir ûzer mînen mannen, |
| 1534 | die dih behuoten unt bewaren |
| 1535 | unt samt dir varen. |
| 1536 | kom dir dîn dinc iht geraite, |
| 1537 | so nelâ mih dîn niht lange baiten. |
| 1538 | kumest dû mir niht sciere, |
| 1539 | ih newirde niemer mêre wîbe ze liebe’. |
| 1540 | Ain scef si mit flîze worhten, |
| 1541 | sô si baz nedorften, |
| 1542 | ez wart wol |
| 1543 | mit |
| 1544 | baidiu golt unde wât |
| 1545 | unt ander maniger slahte rât, |
| 1546 | so iz der edelen kuniginne wol gezam, |
| 1547 | dar zuo vil manic hêrlich man. |
| 1548 | diu frowe îlte an daz |
| 1549 | jâ dient ir dar |
| 1550 | manic edelfrowe. |
| Page 110 |
| 1551 | mit micheln riwen |
| 1552 | si sich dâ scieden. |
| 1553 | ja gehôrte nie niemen |
| 1554 | alse grôzlîche clage: |
| 1555 | unt ensolten si ir niht haben, |
| 1556 | si newolten si niemer |
| 1557 | sô sprach wîp unde man. |
| 1558 | si redeten algemaîne, |
| 1559 | daz ir tiurer nehaine |
| 1560 | newurde nie ze Rôme geborn. |
| 1561 | ir tugent begunden si harte loben. |
| 1562 | Diu frouwe huop sih an daz mer. |
| 1563 | von Rôme ain michel her, |
| 1564 | baide wîp unde man |
| 1565 | scieden alle weinende dan. |
| 1566 | si zugen ûf diu |
| 1567 | si gewunnen grôz unhail: |
| 1568 | von des meres fluote |
| 1569 | brast diu |
| 1570 | dô retranc al daz dâ was, |
| 1571 | daz dâ nihtes niht genas |
| 1572 | wan diu frouwe aine. |
| 1573 | daz gab ir got ze haile: |
| 1574 | die unden wurfen si an den sant. |
| 1575 | dannoh ernerte si der hailant. |
| 1576 | si |
| 1577 | vil dike wart si in |
| 1578 | Des anderen morgenes vil fruo |
| 1579 | diu frowe |
| 1580 | ze tale an des meres sant. |
| 1581 | aine vil guote burc si vant. |
| 1582 | si kom ze ainer armen witewen, |
| 1583 | der herberge begunde si bitten. |
| 1584 | daz wîp sprach, si gerne behielte, |
| 1585 | doh si armuote |
| 1586 | si nemaht ir anders nehain frum sîn. |
| 1587 | duo sprach diu edele kunigîn: |
| 1588 | ‘dû hâst an dem lîbe michel unchraft. |
| 1589 | swaz ih mit den handen verdienen mac, |
| 1590 | ode umbe di |
| 1591 | dâ hilf ih dir vil gerne mite’. |
| 1592 | duo sprach daz sieche wîp: |
| 1593 | ‘dû hâst ain vil hêrlîchen lîp. |
| 1594 | pistû ganz an den vuozzen unt an den handen, |
| 1595 | dunket iz dih danne niht |
| 1596 | daz dû gerne mit mir wil sîn, |
| 1597 | so bevilh ih dir mîn |
| 1598 | unt sich mir guotlîchen zuo’. |
| 1599 | diu frouwe sprach, si woltez gerne tuon. |
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| 1600 | Dem wîbe diente duo diu frowe |
| 1601 | mit micheln triwen, |
| 1602 | zewâre sagen ih iz iu: |
| 1603 | sam si wære ir aigen |
| 1604 | si worhte des si ungewon was, |
| 1605 | si geviel ir ie baz unt baz, |
| 1606 | si was ir wol undertân. |
| 1607 | swaz si mit ir arbeiten gewan, |
| 1608 | dâ diente si ir mite. |
| 1609 | si hête tugentlîche site, |
| 1610 | si was kûske unt raine, |
| 1611 | ir gelîche newart nie nehaine, |
| 1612 | diu mit sô getâner |
| 1613 | ir lait truoge, |
| 1614 | daz sîn nie niemen innen newart. |
| 1615 | jâ diente diu frouwe in der stat |
| 1616 | mêr denne driuzehen jâr. |
| 1617 | daz saget daz buoch vur wâr. |
| 1618 | Der hêrre warte ie ze Rôme, |
| 1619 | wenne dehain bote kôme |
| 1620 | von wîbe ode von kinden, |
| 1621 | ode von anderen den gesinden |
| 1622 | die er ûz sante |
| 1623 | unt si dâ vor rekante. |
| 1624 | der jâmer tet im vil wê, |
| 1625 | sîn herze was im vil |
| 1626 | ja gehôrte nie nehain man |
| 1627 | clage alsô fraissam. |
| 1628 | daz gestuont lange wîle. |
| 1629 | der kunic begunde harte zwîvelen, |
| 1630 | er hiez im gewinnen sîne man, |
| 1631 | er sprach: ‘iwer urloup wil ih hân |
| 1632 | nâh wîbe unt nâh kinden, |
| 1633 | ob ih si |
| 1634 | mir ist daz wîp alsô liep: |
| 1635 | unt envinde ih ir niet, |
| 1636 | sô wil ich iemer |
| 1637 | Clementem daz kindelîn, |
| 1638 | den mînen luzelen sun, |
| 1639 | den bivilh ih ze iweren triwen. |
| 1640 | haizet in diu buoch lêren, |
| 1641 | ziehet in iu selben zêren. |
| 1642 | die wîle daz er kint sî |
| 1643 | lâzet in niht gên frî. |
| 1644 | muoze unde trâcheit |
| 1645 | wirt dike in alter lait, |
| 1646 | wîshait tugent |
| 1647 | unzuht si betruobet. |
| 1648 | swenne der junge man |
| 1649 | mit zuhten wol gesprechen kan |
| 1650 | unde swîgen dâ er sol, |
| 1651 | sô stât sîn |
| 1652 | zuht unde triuwe |
| 1653 | sculn samt |
| 1654 | swâ sih die gesceident, |
| 1655 | ih wæn iz scaden zeiget. |
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| 1656 | er bedarf grôzer wizze, |
| 1657 | swer ze Rôme sol gesizzen |
| 1658 | mitten in dem senâte |
| 1659 | unt daz beste sol râten, |
| 1660 | dar zuo berihten manic rîche. |
| 1661 | sprichet mîn sun dâ wîslîche, |
| 1662 | des habet ir grôz êre, |
| 1663 | so gezimet er iu wol ze hêrren. |
| 1664 | Clementem den jungelinch |
| 1665 | dar nâch elliu mîniu dinch |
| 1666 | bevilh ich ze iweren genâden’. |
| 1667 | dâ wart ain michel jâmer. |
| 1668 | Iedannoh tet der hêrre |
| 1669 | vil manige suoze lêre. |
| 1670 | er nam daz kindelîn bî der hant, |
| 1671 | er bevalh in in ir aller gewalt, |
| 1672 | daz si sîn wol |
| 1673 | ir êre dar an wol behielten. |
| 1674 | wol gehiezen im alle sîne man. |
| 1675 | er kêrte an daz mer fram. |
| 1676 | er vuor durh Siciliam |
| 1677 | dar nâch durh Kalabriam. |
| 1678 | duo er dâ niene vant, |
| 1679 | duo kêrt er in Affricâniskiu lant. |
| 1680 | duo vuor er durh Alexandrîe |
| 1681 | dannen in die wuosten Romanîe. |
| 1682 | iz gescach in ainer mitter naht, |
| 1683 | duo huop sih der gotes slac: |
| 1684 | daz scef allez zeprast, |
| 1685 | daz dâ nihtes niht genas |
| 1686 | wan der hêrre tiure: |
| 1687 | der kom an die |
| 1688 | ain holz begraif er mit den handen, |
| 1689 | die |
| 1690 | im wart vil manic grôz slac. |
| 1691 | iedannoch |
| 1692 | Der hêrre begunde an dem lîbe |
| 1693 | vil harte gezwîvelen, |
| 1694 | daz sîn niemer mêr wurde rât. |
| 1695 | naket stuont er âne wât, |
| 1696 | rîhtuom was im fremede, |
| 1697 | wan in sînem nazzen hemede. |
| 1698 | der ê des rîches hêrre was, |
| 1699 | zewâre sagen ich iu daz: |
| 1700 | dem was sô gar zerunnen |
| 1701 | von diu nedarf sich niemen |
| 1702 | des ubelen noh des guoten, |
| 1703 | wan als in got wil behuoten. |
| 1704 | jâ rief dem tôde |
| 1705 | dem ê diente Rôme. |
| 1706 | dem ê dienten elliu lant, |
| 1707 | frost unt hunger in duo dwanc. |
| 1708 | walt unde steine |
| 1709 | lief er al gemaine |
| 1710 | drî tage unt drîe naht, |
| 1711 | daz er |
| 1712 | Iedannoh wolt in got |
| 1713 | duo sah er ûf bî dem mere |
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| 1714 | ainen |
| 1715 | vil lûte begunde er im |
| 1716 | der |
| 1717 | er kêrte nâh im dar, |
| 1718 | duo frâcte der |
| 1719 | waz im gescehen wære, |
| 1720 | daz er sih sô harte |
| 1721 | ain tail erz im sagete, |
| 1722 | er sprach: ‘ih unt ander |
| 1723 | wolten ze marcte sîn gevaren. |
| 1724 | daz scef ist versunken, |
| 1725 | dar an sint ertrunken |
| 1726 | alle die geverten mîn. |
| 1727 | nû sage mir, ob iender hie nâhe |
| 1728 | zwâre ih dirz sage: |
| 1729 | ez ist an dem vierden tage |
| 1730 | daz ih az noh entranc niet. |
| 1731 | mir wære der tôt allezan liep’. |
| 1732 | Der |
| 1733 | ‘guot man, wie redest dû nû sô? |
| 1734 | dû maht sîn iemer got loben, |
| 1735 | daz dû ûz dem mer bist komen. |
| 1736 | daz guot lâ dir wesen |
| 1737 | daz was ain ubel |
| 1738 | swie naket dû nû stâst, |
| 1739 | nû dû den lîp hâst, |
| 1740 | dîn wirt noh guot rât. |
| 1741 | ain guot burc hie bî stât, |
| 1742 | dâ sint rîche hêrren inne gesezzen, |
| 1743 | dâ maht dû alles dînes laides wol vergezzen’. |
| 1744 | er zôh ûz sîn |
| 1745 | den hêrren |
| 1746 | er gab im wîn unde prôt. |
| 1747 | er sprach: ‘sô getân nôt |
| 1748 | hân ih dike reliten. |
| 1749 | dir neist kunt ze sô getânen siten. |
| 1750 | handelest dûz mit sinne, |
| 1751 | dû maht noh genuoc gewinnen’. |
| 1752 | Des anderen morgenes vil vruo |
| 1753 | di geverten huoben sih duo |
| 1754 | in Laodîcîam: |
| 1755 | dâ bestuont der edele man. |
| 1756 | dâ laid er arbait genuoc: |
| 1757 | den |
| 1758 | er diente arm unt rîchen, |
| 1759 | die |
| 1760 | er behielt gerne die wârhait, |
| 1761 | er hazzet luge unt bôshait. |
| 1762 | dâ mit verdiente er daz, |
| 1763 | daz er in allen liep was. |
| 1764 | luzzel was sîn habe, |
| 1765 | er hête wîslîche rede, |
| 1766 | er was alsô |
| 1767 | si sprâchen, daz sîn wîser dâ niender wære. |
| 1768 | Nû hôren wir diu buoch sagen: |
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| 1769 | under diu chômen ze Jerusalêm gevaren, |
| 1770 | koufliute von Rôme. |
| 1771 | man enpfie si vile scône, |
| 1772 | mit michilem flîze |
| 1773 | in aller slahte rîche: |
| 1774 | wie wol man si êrte |
| 1775 | swâ si hin chêrten! |
| 1776 | do si ze Jerusalêm wâren, |
| 1777 | wie diche si vernâmen, |
| 1778 | wie ein kint in die werlt wære chomen, |
| 1779 | von einer magede geborn! |
| 1780 | sîniu grôzen wunder |
| 1781 | diu sagete man besunder: |
| 1782 | daz er von dem wazzer machte den wîn, |
| 1783 | die |
| 1784 | die plinten hiez er gesehen, |
| 1785 | die tôten hiez er lebende ûf stên. |
| 1786 | Die |
| 1787 | sine sæhen sîn etelîchen teil mit den ougen. |
| 1788 | ein plinter was duo in der stat, |
| 1789 | dem unser hêrre daz lieht wider gap, |
| 1790 | den scouweten si dâ. |
| 1791 | durch wunder fuoren si ze Bêthânîâ, |
| 1791a | [Lâzarum suochten si dâ.] |
| 1792 | dô si den funden, |
| 1793 | sâ ze den selben stunden |
| 1794 | lêrt er si von der gotes guote, |
| 1795 | er |
| 1796 | daz diu |
| 1797 | minneten alle gotelîche lêre. |
| 1798 | Duo die rîchen |
| 1799 | wider ze Rôme solten varen, |
| 1800 | ain gotes |
| 1801 | gehaizen was er Barnabas. |
| 1802 | sancte Pêter der bote |
| 1803 | hiez in varen ze Rôme |
| 1804 | mit den |
| 1805 | daz er dâ wurde |
| 1806 | daz hailige êvangeljum |
| 1807 | hiez er in dâ chunt tuon. |
| 1808 | der hêrre tet durch nôt |
| 1809 | daz im sîn maister gebôt: |
| 1810 | erne vorhte nehain werltlîch |
| 1811 | er gedâht in daz gotes rîche. |
| 1812 | Do si chômen an daz |
| 1813 | ain wazzersuhteger wart ir gewar, |
| 1814 | er chlaget in sîne nôt, |
| 1815 | sîne hant er dar bôt: |
| 1816 | ‘wil dû gelouben an Crist, |
| 1817 | der dîn |
| 1818 | unt ie ân anegenge was,’ — |
| 1819 | sprach der guote sancte Barnabas — |
| 1820 | ‘sô wirstu an dem lîbe unt an der sêle gesunt’. |
| 1821 | der sieche sprach an der stunt: |
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| 1822 | ‘daz geloube ich vil gerne’. |
| 1823 | dô segent in der hailige hêrre. |
| 1824 | als daz crûce wart getân, |
| 1825 | gesunt wart der sieche man. |
| 1826 | duo sprâchen Rômære, |
| 1827 | daz er in ain lieber geverte wære. |
| 1828 | Do die |
| 1829 | in die stat ze Rôme, |
| 1830 | si giengen in daz |
| 1831 | dô volgôt in der heilige apostolus. |
| 1832 | ir gâbe si fur brâhten. |
| 1833 | die fursten si alle frâcten, |
| 1834 | ob in Jerusalêm wære |
| 1835 | iht seltsæner mære, |
| 1836 | die si vernomen habeten, |
| 1837 | daz si ouch in sageten. |
| 1838 | duo sprâchen die koufman: |
| 1839 | ‘wir wellen iu grôz wunder sagen, |
| 1840 | daz von der werlt ist unvernomen: |
| 1841 | ain kint ist von ainer magede geboren’. |
| 1842 | duo sprâchen Rômære, |
| 1843 | daz iz niewan ain |
| 1844 | duo sprâchen ave die |
| 1845 | ‘wir wellen mêre von im sagen. |
| 1846 | |
| 1847 | die werdent alle von im gesunde. |
| 1848 | dehain sieche newart nie sô getân, |
| 1849 | er nehaiz in hail hine gân. |
| 1850 | der plinter von der muoter geboren wart, |
| 1851 | den liezen wir ze Jerusalêm in der stât, |
| 1852 | dem gab er |
| 1853 | ir scult uns wol gelouben, |
| 1854 | want wir in tägelîche sâhen |
| 1855 | die wîle wir dâ wâren’. |
| 1856 | dô sprâehen Rômære, |
| 1857 | daz er ain guot arzât wære. |
| 1858 | Dô sprâchen ave die koufman: |
| 1859 | ‘wir megen grôz wunder von im sagen. |
| 1860 | wie maht er gewaltiger sîn? |
| 1861 | von dem wazzer macht er den wîn; |
| 1862 | der drîe tage lach begraben, |
| 1863 | den hiez er an dem vierden ûf stân. |
| 1864 | wande wir nie widerwunden, |
| 1865 | unz wir den selben man funden. |
| 1866 | die bî im stuonden unt sâzen, |
| 1867 | der wârhait si im alle jâhen’. |
| 1868 | dô sprâchen Rômære, |
| 1869 | daz er einem ir gote gelîch wære, |
| 1870 | unt hêt erz an si gevorderôt, |
| 1871 | si hêten in enpfangen als einen anderen got. |
| 1872 | Duo sancte Barnabas vernam, |
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| 1873 | daz in diu rede wart |
| 1874 | ûf stuont er dâ zestunt, |
| 1875 | er tet in den gotes sun kunt. |
| 1876 | er sprach: ‘wol ir Rômære, |
| 1877 | rechennet iweren scepfære, |
| 1878 | lât disiu bôsiu |
| 1879 | petet an ainen wâren got, |
| 1880 | der iuch von der helle erlôset hât. |
| 1881 | lât iuch an mînen rât: |
| 1882 | ich chunde iu den êwigen lîp. |
| 1883 | vil churz ist daz zît |
| 1884 | dâ wir hie inne scînen. |
| 1885 | jâ muoz diu sêle von dem lîbe |
| 1886 | iedoch ze jungest scaiden’. |
| 1887 | duo antwurt im der Rômære ainer: |
| 1888 | ‘dû dunchest mich ain wîser man. |
| 1889 | chanst dû mir rehte gesagen, |
| 1890 | war umbe der |
| 1891 | springe ûf unt nider diche |
| 1892 | unt iewederhalp veteche hât, |
| 1893 | unt iedoch an sehs painen stât; |
| 1894 | unt der helphant daz |
| 1895 | habet sich ûf mit vieren. |
| 1896 | der bedorfte der vederen michels baz’. |
| 1897 | duo sprach der guote sancte Barnabas: |
| 1898 | ‘unser hêrre Jhêsus Cristus |
| 1899 | sant uns niht ûz |
| 1900 | durch vogel noch durch vihe, |
| 1901 | sunter daz wir den tievel vertriben |
| 1902 | unt |
| 1903 | dô zurnden Rômære. |
| 1904 | si hiezen in rûmen ir |
| 1905 | mit spote wurfen si in dar ûz. |
| 1906 | Clêmens der junchêrre |
| 1907 | der behielt wol sîn lêre, |
| 1908 | wande er dâ vor was gewesen, |
| 1909 | sô wir an den buochen hôren lesen, |
| 1910 | drîe tac unt drîe naht |
| 1911 | daz er |
| 1912 | er sorget allez umbe die sêle, |
| 1913 | mêre den umbe werltlîch êre. |
| 1914 | des nemaht er nehain ende hân. |
| 1915 | die rede |
| 1916 | Swaz der hêrre von gote gesprach, |
| 1917 | daz wart dem kinde liep unt gemach. |
| 1918 | dô sprach der guote sancte Barnabas: |
| 1919 | ‘zewâre sagen ich dir daz: |
| 1920 | ich hân ainen maister, |
| 1921 | gehaizen ist er Pêter, |
| 1922 | hêtestû den vernomen, |
| 1923 | sô wærestu aller êrste volchomen |
| 1924 | alles dînes willen’. |
| 1925 | er sprach: ‘vil lieber geselle, |
| 1926 | wâ vinde ich den guoten man?’ |
| 1927 | ‘chumestu in Judêam, |
| 1928 | dâ gemach ich dir in chunt’. |
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| 1929 | er gab im sâ zestunt |
| 1930 | sîne triwe an sîne hant, |
| 1931 | er chôme nâch im in daz lant. |
| 1932 | Dannen sciet duo Barnabas. |
| 1933 | zewâre sagen ich iu daz: |
| 1934 | Clêmens luzzel wîl |
| 1935 | wan als er sich bereite. |
| 1936 | er vuor tougenlîchen dannen |
| 1937 | von allen sînen mannen. |
| 1938 | er chom ad Cêsarêam. |
| 1939 | do erfrouwet sich der hailige man, |
| 1940 | der guote sancte Barnabas, |
| 1941 | der dâ vor ze Rôme mit ime was. |
| 1942 | als in sancte Barnabas an sach, |
| 1943 | sîn gebete er ze himele sprach: |
| 1944 | ‘owol dû got ammirabilis! |
| 1945 | wie wunderlîch dû bist |
| 1946 | in allen dînen werchen! |
| 1947 | ruoch disen man ze sterchen |
| 1948 | ze dînem lobe unt ze dînen êren’. |
| 1949 | wol enphie er den hêrren, |
| 1950 | er brâht in ze sînem maister. |
| 1951 | alsus gruozt in sancte Pêter: |
| 1952 | ‘hail sî unser wirt guote, |
| 1953 | der mit ainvaltigem muote |
| 1954 | enpfie den boten frône. |
| 1955 | nû gebe dir got ze lône, |
| 1956 | daz dû in der marterære kôre |
| 1957 | enphâhest di himelisken krône, |
| 1958 | want dû hie in dirre werlte furste bist. |
| 1959 | nû lade dich der hailige Christ |
| 1960 | mit der marter in sîn rîche: |
| 1961 | mit den engeln wonest dû êwechlîche’. |
| 1962 | Clêmens huop sîne rede an, |
| 1963 | er sprach: ‘maister, nû scolt dû mir sagen: |
| 1964 | wes trôstestû mich? |
| 1965 | ist diu sêle totlîch? |
| 1966 | sol si ersterben |
| 1967 | unt anderstunt lebentech werden? |
| 1968 | oder sol si in dem fiwer verbrinnen, |
| 1969 | sô si vert hinnen? |
| 1970 | oder sol si êwechlîchen leben? |
| 1971 | oder wirt si ze gerihte gegeben? |
| 1972 | oder verwantelt si sich etewenne |
| 1973 | in dehaine bezzerunge? |
| 1974 | oder sol si gar zergên? |
| 1975 | oder êwechlîche bestên? |
| 1976 | oder sol si zu dem lîchnâmen wider chomen? |
| 1977 | sô ich von manegen hân vernomen. |
| 1978 | sô getâne tougen |
| 1979 | mach ich |
| 1980 | sô ich iz dicke hôre sagen. |
| 1981 | hie ze dir wil ich es gerne ain ende haben. |
| 1982 | ez waiz luzzel dehain man, |
| 1983 | daz ich her zu dir bin gevaren; |
| 1984 | ist ez ouch mit dînen minnen, |
| 1985 | sô nekum ich niemer hinnen |
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| 1986 | dûne |
| 1987 | ich bin gerne in dîner phlege’. |
| 1988 | Duo antwurt im sus |
| 1989 | der hailige apostolus: |
| 1990 | ‘gotwaiz, jungelinch, |
| 1991 | dû vorderst grôzziu dinch. |
| 1992 | diu rede ist niht der tumben. |
| 1993 | nû |
| 1994 | daz er uns ettewie eroffen die sache, |
| 1995 | zewiu er den mennisken habe gescaffen, |
| 1996 | wie getânen lôn diu sêle enphâhe, |
| 1997 | sô si sceidet von dem lîchnâmen’. |
| 1998 | er sprach: ‘Clêmens, lieber friunt mîn, |
| 1999 | nu nelâ dir daz niht lait sîn: |
| 2000 | eine wîle soltû fur daz gadem treten, |
| 2001 | wir geturren noch mit dir niht gebeten’. |
| 2002 | hin ze himele er sach, |
| 2003 | ze sînen jungeren er sprach: |
| 2004 | ‘bruoder mîn vil lieben, |
| 2005 | nû schul wir got |
| 2006 | der jungelinch ist von Rôme geboren, |
| 2007 | er ist durch grôzziu dinc her komen. |
| 2008 | er ist nâhen deme gelouben. |
| 2009 | gesihet er dehaine tougen, |
| 2010 | sô wirt er got gehôrsam’. |
| 2011 | dâ wâren sehse unt drîzec man. |
| 2012 | Sancte Pêter viel drîe |
| 2013 | mit ander der menige, |
| 2014 | bî daz er sîn gebet vol sprach, |
| 2015 | ainen engel er gesah, |
| 2016 | gesendet von himele |
| 2017 | in mennisken pilede. |
| 2018 | Pêtrum unt Clêmenten |
| 2019 | die zuht er von den anderen, |
| 2020 | daz si ir niene sâhen, |
| 2021 | noh enwessen war si chomen wâren. |
| 2022 | An dem selben zît |
| 2023 | ze Getsæmanî versciet ain wîp, |
| 2024 | gehaizen was si Rachêle. |
| 2025 | die tievel nâmen ir sêle. |
| 2026 | si hêten sih gesament dar |
| 2027 | mit ainer sô michelen scar, |
| 2028 | die mennisken niemer gezeln nemahten, |
| 2029 | noch niemens sin betrahten, |
| 2030 | wie vil der tievel wâren |
| 2031 | die die sêle nâmen. |
| 2032 | si fuorten si dâ zestunt |
| 2033 | in der tiefen helle grunt, |
| 2034 | ir |
| 2035 | sam dâ ain burc ist gewunnen. |
| 2036 | Dannen scieden si sih alle drî. |
| 2037 | uber zehen mîle dâ bî |
| 2038 | Vedastus hiez ain hailiger man, |
| 2039 | ain êwarte got gehôrsam: |
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| 2040 | in der selben wîle er versciet, |
| 2041 | diu sêle ist iemer gote liep. |
| 2042 | die engele kômen dar engegene |
| 2043 | mit vil grôzer menige. |
| 2044 | die sêle nâmen si |
| 2045 | ze der hêrren gesihte, |
| 2046 | mit lobe unt mit sange |
| 2047 | vuorten si si dannen. |
| 2048 | die himel sâhen si offen stân. |
| 2049 | der engel sprach zu dem jungen man: |
| 2050 | ‘Clêmens, lieber friunt mîn, |
| 2051 | hie solt dû iemer êwiclîchen sîn, |
| 2052 | mit marter enphæhest dû die crône, |
| 2053 | die himelisken |
| 2054 | Der engel vuor ze himele, |
| 2055 | die hêrren kômen widere |
| 2056 | dâ si der engel dâ vor nam. |
| 2057 | got hête wol zu in getân. |
| 2058 | Duo froweten si sih baide. |
| 2059 | jâ vunden si dâ haime |
| 2060 | ain vil grôz mære: |
| 2061 | jâ was ain |
| 2062 | wider got dar komen, |
| 2063 | gehaizen was er Sŷmon, |
| 2064 | der daz allez verchêrte, |
| 2065 | swaz si von got lêrten. |
| 2066 | Nicêtâ unt sîn bruoder Aquilâ |
| 2067 | kômen ouch zu in dâ; |
| 2068 | si sprâchen: ‘willekomen sîs dû, hêrre Pêter! |
| 2069 | der unser liebe maister, |
| 2070 | zu dir frowet sih unser muot, |
| 2071 | alse den kinden zuo dem vater tuot, |
| 2072 | daz wir dih gesehen haben, |
| 2073 | unser lait wellen wir gote clagen. |
| 2074 | ain |
| 2075 | dem muose wir gehôrsam loben’. |
| 2076 | Duo sprach der heilige man: |
| 2077 | ‘der gehôrsam wil ih iuh ledic sagen. |
| 2078 | uppik |
| 2079 | sîn guot ze lâzen. |
| 2080 | nu envolget im niht mêre’. |
| 2081 | duo sprâchen die bruoder bêde: |
| 2082 | ‘maister, er hât ain |
| 2083 | unt hât iz unter sînem pete begraben: |
| 2084 | dâ mit zoubert er swaz er wil. |
| 2085 | sîner wunder ist alsô vil: |
| 2086 | er sprichet, wellen wir im volgen, |
| 2087 | den |
| 2088 | er sprichet, welle in iemen vâhen, |
| 2089 | der nemege im niemer genâhen. |
| 2090 | swenne er sih welle helen, |
| 2091 | in enmege niemen gesehen. |
| 2092 | swenne er welle resterben |
| 2093 | unt aver lebendich werden: |
| 2094 | swenne im gevalle, |
| 2095 | sô sî er in der helle; |
| 2096 | swenne er welle, ze himele, |
| 2097 | unt aver hie nidene. |
| 2098 | bindet man im die vuoze unt di hende, |
| 2099 | sciere lôst er diu gebende. |
| 2100 | diu slôz haizet er ûf gân, |
| 2101 | nehain îsen mac vor im bestân. |
| 2102 | in hulzînen sûlen |
| 2103 | machet er die sêle, |
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| 2104 | daz di liute wænent daz si leben. |
| 2105 | alte |
| 2106 | swenner wil, sô ist er ain kindelîn, |
| 2107 | swenner aver wil, sô mag er alt sîn. |
| 2108 | sîn vater haizet Antônîus, |
| 2109 | ze Getsæmanî hiez sîn hûs, |
| 2110 | diu muoter haizet Rachêle; |
| 2111 | diu hât ez in gelêret. |
| 2112 | swenne si in hiez snîden gân, |
| 2113 | sîn hant kom nie dar an: |
| 2114 | sîn sichel sneit seiere |
| 2115 | mêr denne ander viere. |
| 2116 | wil er durh ainen berc varn, |
| 2117 | der stêt iemer mêr ingegen im ûf getân’. |
| 2118 | Duo antwurte in sus |
| 2119 | der hailige apostolus: |
| 2120 | ‘nû mîn vil lieben, |
| 2121 | niemen nemac zwain hêrren gedienen. |
| 2122 | Sŷmon ist dar zuo geborn: |
| 2123 | irrituom sol von im komen. |
| 2124 | wir sulen pillîche |
| 2125 | ich getrûwe mînen maister vil wol, |
| 2126 | daz nehain zouberlîch list |
| 2127 | wider in nehain frum ist’. |
| 2128 | Duo frâget der bote mære, |
| 2129 | wâ der |
| 2130 | si sprâchen, er wære in daz |
| 2131 | dar kêrte der hailig apostolus. |
| 2132 | duo volget im Zachêus |
| 2133 | unt der guote Nicodêmus; |
| 2134 | dâ was ouch Sophônîas |
| 2135 | unt der guote Michêas; |
| 2136 | dâ was ouch Josêphus |
| 2137 | unt der guote Lâzarus; |
| 2138 | dâ was ouch Hêlysêus |
| 2139 | unt was ouch Onêsimus, |
| 2140 | dâ was Êlîosdros, |
| 2141 | dâ was Clêmens unt Arinthos. |
| 2142 | dâ was Nicêtâ |
| 2143 | unt sîn pruoder Aquilâ. |
| 2144 | sancte Pêter hin ze himele sach, |
| 2145 | zu sînen jungeren er sprach: |
| 2146 | ‘wol iuch, lieben pruoder mîn, |
| 2147 | nû |
| 2148 | daz die liute werden innen, |
| 2149 | daz wir die wârhait minnen, |
| 2150 | unt daz ih hiute gerede |
| 2151 | so iz sînem namen wol gezeme’. |
| 2152 | als daz gebete ergie, |
| 2153 | si vielen nider an diu chnie, |
| 2154 | hin ze himele si sâhen, |
| 2155 | si sprâchen alle ‘âmen’. |
| 2156 | Sancte Pêter dar în gie, |
| 2157 | die rede er an vie: |
| 2158 | ‘fride sîe hinne |
| 2159 | allen den die got minnen. |
| 2160 | swem fride liep ist, |
| 2161 | den minnet der hailige Crist. |
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| 2162 | daz nû sîe aller hêrist, |
| 2163 | daz rede wir ze aller êrist |
| 2164 | vil harte gedulticlîche, |
| 2165 | von dem gottes rîche |
| 2166 | suln wir rede hân. |
| 2167 | in sînem fride vâhe wir die rede an’. |
| 2168 | Duo sprach Sŷmon: |
| 2169 | ‘wære wir durh fride ûz komen, |
| 2170 | so nekunden di liute von uns niht gesagen. |
| 2171 | |
| 2172 | unt allez daz der ubel ist. |
| 2173 | wir zwêne bedurfen niht frides: |
| 2174 | daz liut sol allez ainander slahen |
| 2175 | unt gerne strît under ainander haben, |
| 2176 | ain lant sol dem anderen an gesigen, |
| 2177 | iz ist pezzer vehten denne |
| 2178 | daz ih wol bewæren wil: |
| 2179 | der liute wurde anders ze vil |
| 2180 | unt wurden ouch ze hêre. |
| 2181 | Pêter, wil dû anders iht reden mêre?’ |
| 2182 | Duo sprach der bote mære: |
| 2183 | ‘daz wil ich hiute wol bewæren, |
| 2184 | daz in der helle gotweiz |
| 2185 | nehain sunde ist sô heiz, |
| 2186 | sô diu grimme |
| 2187 | sô man singet unde liset; |
| 2188 | wande si got selbe verboten hât, |
| 2189 | unt iz in der ê gescriben stât: |
| 2190 | “niemen dû enslahe, |
| 2191 | dû wirst sculdic an dem |
| 2192 | Sŷmon sprach dô: |
| 2193 | ‘Pêter, wi gâhest dû nû sô? |
| 2194 | dû wil ê reden |
| 2195 | unt wil dir selben antwurte geben’. |
| 2196 | duo sprach der gotes trût: |
| 2197 | ‘nû sag uber lût: |
| 2198 | wil dû gotes frides |
| 2199 | sô wil ih dih gerne lâzen reden’. |
| 2200 | Duo wart dem koukelære |
| 2201 | daz wort vil swære, |
| 2202 | daz er sô dike fride sprach: |
| 2203 | jâ was der fride sîn ungemach. |
| 2204 | er sprach: ‘Pêter, dû bist ain wunderlîch man, |
| 2205 | daz dû daz niht chanst verstân, |
| 2206 | daz dir daz wort widerwertich ist. |
| 2207 | jâ sprichet dîn maister Christ: |
| 2208 | “ih enkom umbe daz niht an die erde, |
| 2209 | daz fride sule werden, |
| 2210 | sunder daz swert sol gesigen”. |
| 2211 | wie wil dû daz |
| 2212 | daz dîn maister hât gelêret, |
| 2213 | daz hâst dû verkêret. |
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| 2214 | daz er daz swert ûz sendet, |
| 2215 | daz hâstû ze fride gewendet. |
| 2216 | diu zwei wort |
| 2217 | nû rede dû dâ engegene |
| 2218 | swaz sô du wellest, |
| 2219 | ob dû iht kunnest’. |
| 2220 | Duo antwurte im sus |
| 2221 | der heilige apostolus: |
| 2222 | ‘dû hâst diu buoch unrehte vernomen, |
| 2223 | dîn wîstuom hât dih dâ betrogen: |
| 2224 | daz werltlîche swert wil dû gehaben, |
| 2225 | daz dem lîbe mag gescaden, |
| 2226 | unt wil daz verswîgen, |
| 2227 | daz dâ gehôret ze dem êwigen lîbe. |
| 2228 | ih zeige dir gescriben dâ bî: |
| 2229 | ‘beati pacificî’: |
| 2230 | wie sælichlîche si lebent |
| 2231 | die fride machent unde berent, |
| 2232 | wande si gehaizen sint |
| 2233 | des lebendigen gottes kint’. |
| 2234 | Duo sprach Sŷmon: |
| 2235 | ‘ih hân daz wort wol vernomen. |
| 2236 | zewâre sagen ih dir, Pêter: |
| 2237 | daz ist wider dînen maister. |
| 2238 | nu du ruogest den maister dîn, |
| 2239 | sô wil dû uber in sîn. |
| 2240 | jâ sprichet dîn maister daz: |
| 2241 | “wirt der junger sam der maister was, |
| 2242 | dâ mit sol is in genuogen”. |
| 2243 | dû wil dih uber dînen maister uoben. |
| 2244 | nû sprich, ob die zwô rede |
| 2245 | iemen ze ainer bringen mege’. |
| 2246 | Duo sprach der bot raine: |
| 2247 | ‘die rede wil ih dir baz |
| 2248 | unser hêrre der heilant |
| 2249 | hât sîne jungere in die werlt gesant |
| 2250 | ze toufen unt ze lêren, |
| 2251 | die heiden ze bechêren. |
| 2252 | in swelhez hûs wir gên, |
| 2253 | dâ sulen wir fride în geben. |
| 2254 | ist iemen dar inne, |
| 2255 | der got vurhte unt minne, |
| 2256 | dem ist der gotes fride gekundet, |
| 2257 | mit dem hailigen gaiste enzundet. |
| 2258 | von diu werdent gesceiden |
| 2259 | der sweher von dem eidem, |
| 2260 | der vater von sînem sune, |
| 2261 | diu swiger von ir snure, |
| 2262 | bruoder von dem bruoder, |
| 2263 | tohter von der muoter’. |
| 2264 | Duo sprach Sŷmon: |
| 2265 | ‘Pêter, dîn maister newas niht volkomen. |
| 2266 | er enhête niht volle sinne; |
| 2267 | ih |
| 2268 | ich enwil sîn niht haben |
| 2269 | ze ainem wârem wîssagen. |
| 2270 | swer daz wîp sceidet von dem man, |
| 2271 | daz ist unrehte getân, |
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| 2272 | waz mac man dar an guotes getuon, |
| 2273 | daz man den vater sceidet von dem sun, |
| 2274 | bruoder von dem pruoder, |
| 2275 | tohter von der muoter? |
| 2276 | der die |
| 2277 | der ist gewislîche niht guot, |
| 2278 | wande si muoz wider der ê sîn. |
| 2279 | Pêter, nû antwurte dû der rede mîn’. |
| 2280 | Duo antwurte im sus |
| 2281 | der hailige apostolus: |
| 2282 | ‘diu |
| 2283 | swer si durh got tuot. |
| 2284 | wir suln kunden den sînen namen, |
| 2285 | den gelouben |
| 2286 | uber alle dise erde, |
| 2286a | [swer des geruoche unt gere]. |
| 2287 | versmâhet iz ainem pruoder |
| 2288 | so enphæhet iz der ander. |
| 2289 | enphâhet iz der sun, |
| 2290 | so newil iz der vater niht tuon; |
| 2291 | enphæhet iz diu tohter, |
| 2292 | sô hazzet iz diu muoter. |
| 2293 | enphæhet iz der aidem, |
| 2294 | der sweher wil sih von im scaiden, |
| 2295 | da gestêt daz gotes wort êwiclîche |
| 2296 | unt gevellet des tievels rîche. |
| 2297 | swer hie in sîner zît |
| 2298 | verlæt kint ode wîp, |
| 2299 | aigen ode lêhen, |
| 2300 | durh willen unsers hêrren, |
| 2301 | ode iht des er hât, |
| 2302 | dem vergilt iz got hie zehenzecvalt |
| 2303 | unt dort sîn himelrîche: |
| 2304 | dâ wonet er iemer êwiclîche. |
| 2305 | Sŷmon, nû sezze in dînen muot: |
| 2306 | ist diu |
| 2307 | wil dû dâ wider iht reden, |
| 2308 | daz wil ih gerne vernemen’. |
| 2309 | Duo sprach Sŷmon: |
| 2310 | ‘dîn rede newil ih niht langer |
| 2311 | ih wil dir vur legen, |
| 2312 | daz alle die wol |
| 2313 | die hie sizzen unde stân, |
| 2314 | daz ih die wârhait hân. |
| 2315 | diu ôren muost dû |
| 2316 | den ruke kêren ze fliehen, |
| 2317 | daz dû scantlîche stâst, |
| 2318 | sô dû antwurte niene hâst, |
| 2319 | unt denne di liute niemer mêre |
| 2320 | vernement nehain dîn lêre. |
| 2321 | sô si mih gehôrent, |
| 2322 | sô ist dîn irretuom gar zestôret’. |
| 2323 | Duo sprach der gotes trût: |
| 2324 | ‘Sŷmon, nû rede uber lût |
| 2325 | swaz sô dir gevalle. |
| 2326 | lâ die hôrære jehen alle, |
| 2327 | ob ih dîner rede |
| 2328 | geantwurten kunne ode mege’. |
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| 2329 | Duo sprach der |
| 2330 | ‘Pêter, ih wil hiute hie bewæren, |
| 2331 | daz manic got sî, |
| 2332 | unt spriche dâ bî: |
| 2333 | si sint ainem got undertân, |
| 2334 | des dû dih niht maht verstân: |
| 2335 | er ist von dir unrekant. |
| 2336 | er ist got uber si alle samt, |
| 2337 | er ist aller gotte hêrre, |
| 2338 | den wil ich dich lêren, |
| 2339 | er ist unkunt den goten allen. |
| 2340 | nû antwurte, ob dir gevalle’. |
| 2341 | Duo sprach der bote mære: |
| 2342 | ‘diu rede ist gewisse seltsæne. |
| 2343 | sage mir, wannen dû den got erkennest, |
| 2344 | den dû uns sô unkunden vor nennest, |
| 2345 | der uber alle gote sî, |
| 2346 | unt sage uns dâ bî: |
| 2347 | wie wil dû bewæren |
| 2348 | ainen got sô mæren? |
| 2349 | hâst dû in von hebrêisker scrifte? |
| 2350 | ode von der |
| 2351 | ode von scrifte der Chriechen? |
| 2352 | ode von welher slahte buochen? |
| 2353 | ode kundent in uns die wîssagen? |
| 2354 | ode megen wir dehaine gewisheit von im haben, |
| 2355 | daz er alsô lange frist |
| 2356 | alle dise werlt |
| 2357 | Duo sprach Sŷmon: |
| 2358 | ‘Pêter, war ist dîn wîstuom komen? |
| 2359 | nu enkanst dû niht mêre. |
| 2360 | ih wil dih wol lêren: |
| 2361 | dû vindest ouh gescriben stân, |
| 2362 | daz di gote sprâchen: “machen wir ain man”. |
| 2363 | in der selben lineâ |
| 2364 | vindest dû gescriben dâ: |
| 2365 | “nû ist Adâm |
| 2366 | alse unser ainer getân”. |
| 2367 | der rede kan ich dir genuoc cellen. |
| 2368 | duo îlten di juden ûz wellen |
| 2369 | ainen got in Israhêl, |
| 2370 | der nehât gewaltes niht mêr; |
| 2371 | er ist aller gotte hêrre. |
| 2372 | Pêter, waz kanstû nû mêre?’ |
| 2373 | Der gotes bote liebe |
| 2374 | begunde ain tail smielen. |
| 2375 | er sprach: ‘Sŷmon, Sŷmon, |
| 2376 | wir nehân sôgetânes niht vernomen, |
| 2377 | daz wir diu ôren durfen verscieben, |
| 2378 | noh den ruke kêren ze fliehen, |
| 2379 | noh nehain sô getân rede, |
| 2380 | dâ wir den vuoz durfen umbe wegen. |
| 2381 | dû hâst ain rede erhaben, |
| 2382 | die ich dir baz kan gesagen, |
| 2383 | denne dû si kunnest verstên. |
| 2384 | lâzen wir di hôrâre des jehen. |
| 2385 | got rîcheset aine |
| 2386 | uber alle di werlt gemaine. |
| 2387 | er gibet lîp âne tôt, |
| 2388 | er gibet genâde âne nôt, |
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| 2389 | iz ist allez in sîner gewalt, |
| 2390 | niemen nimet ez ûz sîner hant. |
| 2391 | Moyses prophêtâ |
| 2392 | scrîbet von im dâ: |
| 2393 | ‘deus deorum, |
| 2394 | dominus dominorum, |
| 2395 | dû bist hêrre unt wârer got, |
| 2396 | allez daz der ist daz ervullet dîn gebot’. |
| 2397 | Dâvîd prophêtâ |
| 2398 | ruofit in an sâ: |
| 2399 | ‘hêrre got, dû bist |
| 2400 | dir enwart nie niht gelîch. |
| 2401 | in dînen gnâden stât |
| 2402 | allez daz iemer wirt ode ie wart. |
| 2403 | dû bist ain wârer got, |
| 2404 | daz ander ist allez ain |
| 2405 | Duo sprach aver der wâre gotes |
| 2406 | ‘Sŷmon, wi getorstes dû ie werden lût, |
| 2407 | daz dehain got wære |
| 2408 | wan in Israhêle? |
| 2409 | der engel sprach, er wolte got sîn, |
| 2410 | des |
| 2411 | von diu muoz er mit sêre |
| 2412 | die helle bûwen iemer mêre. |
| 2413 | daz der slange gesprach, |
| 2414 | waistû wiez got an im rach? |
| 2415 | von diu muoz er ûf der erde |
| 2416 | an den brusten |
| 2417 | got hiez von nihte werden die engele, |
| 2418 | daz si in loben unt erkennen. |
| 2419 | den mennisken scuof er von der erde. |
| 2420 | dâ muoz er aver zuo werden. |
| 2421 | der engel ist bewegilîch, |
| 2422 | der menniske ist tôtlîch. |
| 2423 | nû sprich, waz mac gote gelîh sîn? |
| 2424 | antwurte dû der rede mîn’. |
| 2425 | Duo sprach Sŷmon: |
| 2426 | ‘Pêter, du newaist wie daz kom. |
| 2427 | ih waiz iz micheles paz, |
| 2428 | want ih dâ mit was, |
| 2429 | daz dû menniske pist |
| 2430 | unt dih der himele underwindist. |
| 2431 | ja nekanstu der erde niht gemezzen, |
| 2432 | der fiunf sinne bistu |
| 2433 | in fiunf sinnen stât |
| 2434 | allez daz der ie wart: |
| 2435 | bêdiu kunst unt vernunft |
| 2436 | unt aller mennisken tugent’. |
| 2437 | Duo sprach sancte Pêter: |
| 2438 | ‘ubele lêrte dih dîn maister, |
| 2439 | |
| 2440 | ih wil dih baz lêren. |
| 2441 | die hêren wîssagen |
| 2442 | die muosen den sehsten sin haben, |
| 2443 | di der hailige gaist sô enzunte, |
| 2444 | daz si vor kunten |
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| 2445 | daz in die werlt kunftic was. |
| 2446 | Sŷmon, wan sagest dû mir daz? |
| 2447 | wie suln wir dînem got dienen? |
| 2448 | nu erchennet in niemen. |
| 2449 | wie suln wir in erkennen? |
| 2450 | mahtû in uns nennen?’ |
| 2451 | Duo sprach Sŷmon: |
| 2452 | ‘Pêter, sô wærestû sciere verlorn. |
| 2453 | nehaines mennisken ôren |
| 2454 | nesuln sînen namen niemer gehôren. |
| 2455 | ez enwart nie nehain engel sô hêr, |
| 2456 | der in rekenne mêr, |
| 2457 | wan ih aine |
| 2458 | unt dem ih in wil zaigen. |
| 2459 | der got der himele unt erde gescaffen hât, |
| 2460 | der newaiz niht wie iz umbe in stât. |
| 2461 | ih sage dir, Pêtrê, |
| 2462 | mih lêrte in diu ê. |
| 2463 | |
| 2464 | si newaiz selbe wiez umbe in stât’. |
| 2465 | Gruntveste der christenheit |
| 2466 | antwurte im gereit: |
| 2467 | ‘Sŷmon, pistû von mennisken geboren? |
| 2468 | ode wannen pistû in die werlt komen? |
| 2469 | daz dû dâ mit wære, |
| 2470 | dâ unser scephære |
| 2471 | himel unt erde gescaffen hât. |
| 2472 | nam dih got an sînen rât? |
| 2473 | unt daz dih diu ê gelêret hât |
| 2474 | ain got den si selbe niet verstât, |
| 2475 | wie daz iemer mahte gescehen, |
| 2476 | daz lâ die hôrære jehen’. |
| 2477 | Duo sprach des tievels man: |
| 2478 | ‘Pêter, daz wil ih dir rehte sagen. |
| 2479 | ich enpin niht mennisklîch, |
| 2480 | doh ih rede wider dich, |
| 2481 | ich enhân wazzer noh erde, |
| 2482 | ich ensol niemer resterben. |
| 2483 | von fiure unt von lufte |
| 2484 | nam ih mir crefte. |
| 2485 | ih waiz wol waz dâ ze himele ist, |
| 2486 | ih enpin niht menniske alsô dû bist. |
| 2487 | mir ist wol kunt |
| 2488 | in des tiefen meres grunt, |
| 2489 | walt unde staine |
| 2490 | die waiz ich algemaine. |
| 2491 | iz newart nie nehain sêle |
| 2492 | noh enwirt niemer mêre, |
| 2493 | ich newizze ir angenge unt ir ende, |
| 2494 | war si sul gewenden’. |
| 2495 | Duo sprach der bote hêre: |
| 2496 | ‘nû sage mir von dîner muoter Rachêle, |
| 2497 | war ir sêle si gevaren; |
| 2498 | des wolt ich gerne ain ende haben’. |
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| 2499 | duo sprach Sŷmon: |
| 2500 | ‘wie sol iz umbe di sêle chomen, |
| 2501 | diu noh in dem lîhnâmen ist? |
| 2502 | du newaist wes du vrâgist’. |
| 2503 | Duo sprach der heilige apostolus: |
| 2504 | ‘dîn vater hiez Antônîus, |
| 2505 | dîn muoter hiez Rachêle, |
| 2506 | die tievel nâmen ir sêle, |
| 2507 | des ist hiute der dritte tac. |
| 2508 | wie kumt iz daz dû ir gehelfen niene maht? |
| 2509 | si ist in der helle begraben: |
| 2510 | dâ soltestû si relôset haben’. |
| 2511 | Duo sprach des vâlandes man: |
| 2512 | ‘vater noh muoter ih nie gwan. |
| 2513 | doh ich heize Sŷmon, |
| 2514 | von mennisken bin ih niht geborn. |
| 2515 | himel unt erde nemegen mih niht gehaben, |
| 2516 | die engele sulen mich under den handen tragen. |
| 2517 | ih pin aller gote hêrre. |
| 2518 | Pêter, nû enfrâge niht mêre. |
| 2519 | wolte îh dih haben verlorn, |
| 2520 | ih hête sciere gerochen mînen zorn’. |
| 2521 | Duo sprach der gotes |
| 2522 | ‘dû redetest ê uber lût, |
| 2523 | daz menniske unt engel |
| 2524 | suln dînen got niemer genennen, |
| 2525 | unt nû anderstunt gihist, |
| 2526 | daz dû selbe got sîst. |
| 2527 | daz dû sô grôzen gewalt hâst |
| 2528 | unt sô ungerne bî mir stâst, |
| 2529 | |
| 2530 | duo relachete alle diu menige. |
| 2531 | Sancte Pêter der hailige man |
| 2532 | hiez im ain prôt tougenlîche tragen, |
| 2533 | er segentez in dem namen des vateres unt des sunes |
| 2534 | unt des heiligen gaistes. |
| 2535 | die hant er |
| 2536 | ‘Sŷmon, bistû der wâre got? |
| 2537 | nû sprich, dû hêre wîssage, |
| 2538 | waz ih in der hant habe, |
| 2539 | ode wes gedenche ih mir |
| 2540 | nekanstû mir des niht rehte gesagen, |
| 2541 | sô bist dû ein unwerder got. |
| 2542 | von rehte bistû der liute spot, |
| 2543 | got hât dîn vergezzen, |
| 2544 | mit dem tievel bistû besezzen, |
| 2545 | daz dû dîn ie ze gote |
| 2546 | dû bist ain |
| 2547 | die tievel helfent dir dar zuo, |
| 2548 | sô dû zouber wil tuon, |
| Page 128 |
| 2549 | die liute dâ mit triegen. |
| 2550 | dû sprichest, dû wellest fliegen: |
| 2551 | daz enhaizet den plinden niht gesehen, |
| 2552 | den tôten niht ûf stên, |
| 2553 | der miselsuhtige newirt dâ niht gereinet: |
| 2554 | vor gote bistû verteilet’. |
| 2555 | Duo sprach Sŷmon: |
| 2556 | ‘Pêter, war ist nû dîn fride komen? |
| 2557 | von dînem fride nemaht ê niemen genesen. |
| 2558 | wil dû nû vehtære wesen? |
| 2559 | dû hebest dih engegen mir sô grôze. |
| 2560 | ih wæne, dû dih mir wil genôzen. |
| 2561 | dû bist ze |
| 2562 | nû wære dû ain arm vischære’. |
| 2563 | Duo antwurte im sus |
| 2564 | der hailige apostolus: |
| 2565 | ‘nû wel dir ûz der menige |
| 2566 | der wîsisten zweleve. |
| 2567 | gên wir haim in dîn hûs, |
| 2568 | nim dînen tôten her ûz, |
| 2569 | ain kint |
| 2570 | dâ dû mit hâst gezouberôt, |
| 2571 | daz hâstû under dînem pette begraben. |
| 2572 | dâ suln wir der rede ain ende haben’. |
| 2573 | Der gotes widerwarte, |
| 2574 | der rede erkom er harte, |
| 2575 | elliu sîn varwe |
| 2576 | verwandelte sih garwe. |
| 2577 | er gewan manigen angestlîchen gedanch, |
| 2578 | vil kûme er gesaz ûf die panch, |
| 2579 | er vorhte, ob er lougenôte, |
| 2580 | daz si den tôten |
| 2581 | in sîme hûs vunden, |
| 2582 | daz si in sâ zestunden |
| 2583 | hiengen ode branten. |
| 2584 | mit michelen scanden |
| 2585 | rûmt er daz |
| 2586 | diu menige îlte nâh im dar ûz. |
| 2587 | si kômen des inaine, |
| 2588 | si wolten im gerne stainen. |
| 2589 | duo weget im der hailige man. |
| 2590 | wie kûme er in nahtes entran! |
| 2591 | Duo wîhet er Zachêum, |
| 2592 | er bevalh im daz bistuom. |
| 2593 | duo sprach wîp unde man, |
| 2594 | got hête wol zu in getân. |
| Page 129 |
| 2595 | si wurden alle vil frô, |
| 2596 | got lobeten si dô, |
| 2597 | al daz in der stete was: |
| 2598 | si sprâchen alle ‘deo gracias’. |
| 2599 | Nû saget uns diu scrift dâ: |
| 2600 | in dem mere was ain insulâ; |
| 2601 | Arantum haizet diu stat, |
| 2602 | dâ diu frouwe almuosenes pat, |
| 2603 | von Rôme diu edele kunigîn. |
| 2604 | dâ wâren sûle glesîn, |
| 2605 | dannen sagete man michel wunder. |
| 2606 | die jungere wunsceten alle bisunder, |
| 2607 | daz si die sûle muosen sehen, |
| 2608 | si bâten in urloup dar geben. |
| 2609 | duo sprach der heilige man: |
| 2610 | ‘ih wil selbe mit iu dar varen’. |
| 2611 | Die hêrren wurden vil frô, |
| 2612 | ze sceffe giengen si dô. |
| 2613 | dô si daz werk ersâhen, |
| 2614 | ih waiz, si alle jâhen, |
| 2615 | daz si nie gesæhen |
| 2616 | nehain werc sô spæhe |
| 2617 | von mennisken hant: |
| 2618 | iz wære wol mære uber elliu lant. |
| 2619 | die jungere begunden scowen; |
| 2620 | sancte Pêter kêrte in ainen winkel tougen: |
| 2621 | ûzerhalp der menige |
| 2622 | suocht er sîne venie, |
| 2623 | er viel an sîn bariu knie. |
| 2624 | ein frowe dar zuo im gie, |
| 2625 | si sprach: ‘hêrre, durh dîne guote |
| 2626 | |
| 2627 | die ih vil arme hân. |
| 2628 | si redent alle, dû sîst ain guot man. |
| 2629 | spîse ist mir tiure, |
| 2630 | nu bedarf ih dîner stiure: |
| 2631 | beruoche mih hiute disen tac, |
| 2632 | want dirz got wol vergelten mac’. |
| 2633 | Duo der hêrre vernam ir bete, |
| 2634 | ûf stuont er dâ zestete, |
| 2635 | er begunde die vrowen |
| 2636 | ain wîle an scowen, |
| 2637 | er sprach: ‘sage mir, guot wîp, |
| 2638 | hâstû noh ganzen lîp, |
| 2639 | zewiu treistû den |
| 2640 | mehtes dû arbaiten, |
| 2641 | verlêh dir got ganze hende, |
| 2642 | sô hâstû des grôze sunde, |
| 2643 | wil dû die muozec tragen. |
| 2644 | wane hôrest dû den wîssagen: |
| 2645 | wie sâlic der lebe, |
| 2646 | der der hende arbaite phlege?’ |
| 2647 | ‘wære ih’, sprach diu frowe, ‘an dem lîbe gesunt, |
| 2648 | sô wær ih gewisse tump; |
| 2649 | hête ih ganze hende, |
| 2650 | sô dûhtez mih selbe |
| 2651 | ih enhân gesunt noh |
| 2652 | ih pin ein lamiu |
| Page 130 |
| 2653 | gebuozest dû mir dehaine mîn nôt, |
| 2654 | daz vergiltet dir der gewaltige got’. |
| 2655 | Duo sprach der heilige man: |
| 2656 | ‘nû solt dû billîche helfe hân, |
| 2657 | nû dû an dem lîbe bist |
| 2658 | ich |
| 2659 | woltes dû mir verjehen, |
| 2660 | wannen iz dir sî gescehen, |
| 2661 | |
| 2662 | der dir guot ist der zuo’. |
| 2663 | ‘Tuo, hêrre, |
| 2664 | mir nemac niemen frum sîn. |
| 2665 | owî, duo mir aller êrist ubele gescach, |
| 2666 | daz ih mih selben niht erstach, |
| 2667 | noh mih niht ertrancte enzît, |
| 2668 | ê ih sus |
| 2669 | daz daz arme gebeine geruowet wære! |
| 2670 | ih wæne ie wîbe sô laide gescæhe’. |
| 2671 | Duo antwurte ir sus |
| 2672 | der hailige apostolus: |
| 2673 | ‘vrowe, nû |
| 2674 | di gedanche sint ze nihte guot. |
| 2675 | swer im selben tuot den tôt, |
| 2676 | der hât der mit erarnôt, |
| 2677 | daz diu arme sêle |
| 2678 | brinnet in der helle iemer mêre’. |
| 2679 | ‘owî’, sprach si, ‘lieber hêrre, |
| 2680 | |
| 2681 | in der helle brinnen? |
| 2682 | maht ih dâ mit wider gewinnen, |
| 2683 | daz ih ze ainmâl gesæhe mîniu kint, |
| 2684 | diu sô lange von mir sint, |
| 2685 | daz ih ir gebaine solte begraben, |
| 2686 | dar umbe ih den lîp |
| 2687 | Duo trôste si wol der hêrre, |
| 2688 | er sprach: ‘frouwe, nû neclage dû niht sêre. |
| 2689 | allez wainen ist verboten |
| 2690 | von dem almehtigen gote, |
| 2691 | wan die sunde aine: |
| 2692 | die zeher die sint raine. |
| 2693 | eroffen mir die sache, |
| 2694 | di dir daz lait habent gemachet, |
| 2695 | daz dir an dem lîbe sî missescehen. |
| 2696 | dîn kunne solt dû mir vur legen. |
| 2697 | ich wil dir guot sîn. |
| 2698 | geloubestû an mînen trehtîn, |
| 2699 | der dih gescaffen hât, |
| 2700 | sô wirt dîn noh guot rât’. |
| 2701 | ‘mînes kunnes’, sprach si, ‘hêrre, nu |
| 2702 | daz ich angeste an dem lîbe |
| 2703 | alsô lange reliten hân, |
| 2704 | des wil ich dir ain tail sagen: |
| 2705 | Mîn vater unt mîn muoter |
| 2706 | hêten kunne guotez. |
| 2707 | si wâren genuoc rîche, |
| 2708 | si zugen mih mit flîze. |
| 2709 | si gâben mih einem edelen man, |
| Page 131 |
| 2710 | bi dem ich zwêne sune ensamt gewan. |
| 2711 | ainen bruoder habete mîn hêrre, |
| 2712 | mir ze michelem sêre. |
| 2713 | der was ain fraislîh man, |
| 2714 | unkûske suocht er mich an, |
| 2715 | er gerte mîner minne. |
| 2716 | duo phlac ih guoter sinne |
| 2717 | unt |
| 2718 | daz ih mih vor im gefriste, |
| 2719 | daz ih mîn kunne niht entêrte. |
| 2720 | mîn gemuote mih lêrte, |
| 2721 | daz ih im entrunne, |
| 2722 | sô ih daz dritte kint gewunne, |
| 2723 | dâ mit ih was bevangen. |
| 2724 | duo klagete ih mînem manne: |
| 2725 | ih hête in mînem troume gesehen, |
| 2726 | mîniu kint ensolten daz jâr niemer geleben, |
| 2727 | noh enwurden uns niemer ze êren, |
| 2728 | ih enhieze si diu buoch lêren. |
| 2729 | duo nam ih phellel unde scaz, |
| 2730 | zewâre sagen ih dir daz, |
| 2731 | ih sante si ze scuole; |
| 2732 | ih newaiz war si vuoren: |
| 2733 | mir nekom nie dehain man, |
| 2734 | der mir von in iht kunde gesagen’. |
| 2735 | ‘Hêrre, dannoh’, sprach si, ‘was ih haime |
| 2736 | mit michelem laide. |
| 2737 | gedanke hêt ih genuoge, |
| 2738 | wi ih des |
| 2739 | ich clagete mîne nôt, |
| 2740 | ih sprach, mir wære gerait der tôt, |
| 2741 | ih enmuose mîniu kint gesehen. |
| 2742 | ih pat mir urloup geben. |
| 2743 | ungern ez mîn man tete, |
| 2744 | iedoh gewert er mih der bete. |
| 2745 | er enphalh mih sînen mannen. |
| 2746 | duo huoben wir uns dannen. |
| 2747 | do retranc allez daz dâ was. |
| 2748 | laider, hêrre, daz ih genas! |
| 2749 | ze mînem unhaile |
| 2750 | kom ih zu einem staine. |
| 2751 | ainer armen witwen chom ih zuo, |
| 2752 | der diente ih sît spâte unde fruo |
| 2753 | die wîle ih an dem lîbe ganz was. |
| 2754 | nû ist iz chomen an daz, |
| 2755 | daz mih daz |
| 2756 | vil luzel ist der unser rât: |
| 2757 | swaz wir rebetelen baide, |
| 2758 | daz ist algemaine. |
| 2759 | hêrre, dû hâst wol vernomen, |
| 2760 | wie mir mîn sache ist komen. |
| 2761 | nu ensolt dû niht |
| 2762 | tuo mir ettilîche gnâde. |
| 2763 | bescere mir ettelîchen rât, |
| 2764 | mîn |
| 2765 | Do si alzan an der rede wâren, |
| 2766 | unt er si wolte mêr frâgen, |
| 2767 | duo kom Clêmens der jungelinc: |
| 2768 | ‘maister’, sprach er, ‘sô getâniu dinc, |
| 2769 | sô ich hie hân resehen, |
| 2770 | sô muoz ih von wârheit jehen, |
| 2771 | daz in allem rîche |
| Page 132 |
| 2772 | disem wunder niht mac gelîchen’. |
| 2773 | duo sprach der hailige man: |
| 2774 | ‘nû solt dû ze sceffe gân. |
| 2775 | île dû vor, liebe, |
| 2776 | ich kom nâh dir sciere’. |
| 2777 | Der gotes pote hêre |
| 2778 | vrâcte di frowen mêre: |
| 2779 | ‘wie hiezen dîniu kint, |
| 2780 | diu sô lange von dir sint?’ |
| 2781 | diu frouwe sagete iz im ungerne. |
| 2782 | ain wîle betrouc si den hêrren, |
| 2783 | si sprach: ‘ainer hiez Sisinnîus, |
| 2784 | der ander Êlîosdros’. |
| 2785 | ‘owî!’ sprach der hailige man, |
| 2786 | ‘ih wânde, daz wir froude solten hân. |
| 2787 | ain jungelinc ist von Rôme her komen, |
| 2788 | von dem hân ich vernomen, |
| 2789 | wi sîne bruoder vuoren ze scuole, |
| 2790 | wi diu muoter nâh fuore, |
| 2791 | wie si âne meil entran. |
| 2792 | ze jungest |
| 2793 | duo si lange wâren in wege. |
| 2794 | der kint sagete mir selbe di rede, |
| 2795 | den si liezen haime. |
| 2796 | ienoh hiute sint si gescaiden, |
| 2797 | daz si niemer mêr wurden vunden’. |
| 2798 | daz wîp wart under stunden |
| 2799 | rôt sam daz pluot, |
| 2800 | si Note: La.=erzunden sam daz fiur tuot; |
| 2801 | unter stunden wart si blaich, |
| 2802 | der lîp ir gar |
| 2803 | duo segente si der hailige man, |
| 2804 | er hiez si wol gesunt ûf stân. |
| 2805 | Alse diu frouwe daz verstuont, |
| 2806 | daz si an dem lîbe was gesunt, |
| 2807 | si viel im ze vuozen: |
| 2808 | ‘hêrre’, sprach si, ‘daz ih den kint sehen muoze! |
| 2809 | er ist wærlîch der sun mîn’. |
| 2810 | ‘nû kunde dû mir ê‘, sprach er, ‘den namen sîn’. |
| 2811 | ‘Clêmens ‘, sprach si, ‘lieber hêrre, — |
| 2812 | ih sage dirz ungerne — |
| 2813 | mîn jungester sun hiez, |
| 2814 | den ih ze Rôme liez’. |
| 2815 | ‘nu gehabe dih wol‘, sprach er, ‘liebe, |
| 2816 | den zeige ih dir sciere’. |
| 2817 | er nam die frowen bî der hant, |
| 2818 | er wîste si dâ si Clêmentem vant. |
| 2819 | Clêmens sah sîn maister |
| 2820 | die frouwen zuo laiten. |
| 2821 | er enphie iz vur spot, |
| 2822 | er sprach: ‘maister, waz ist diz, durh got?’ |
| 2823 | diu frowe zuo dem chinde gie, |
| 2824 | mit den armen si in umbevie, |
| 2825 | Clêmens von ir wancte, |
| 2826 | nehainer minne er ir gehancte, |
| 2827 | er betrahte si ze unsinne, |
| 2828 | er wolt ir gerne entrinnen. |
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| 2829 | Duo sprach der hailege man: |
| 2830 | ‘sun, dû solt si liep hân: |
| 2831 | si ist dîn edeliu muoter guot, |
| 2832 | diu dich ze dirre werlte getruoc’. |
| 2833 | der junchêrre wart duo balt, |
| 2834 | ir wunne wart duo manicvalt, |
| 2835 | die si habeten under in. |
| 2836 | daz vuocte wol mîn trehtîn, |
| 2837 | ouh half sîn wol sîn maister, |
| 2838 | der guote sante Pêter. |
| 2839 | duo iz di purgære vernâmen, |
| 2840 | si îlten alle dar gâhen, |
| 2841 | si wurden alle vil frô, |
| 2842 | got lobeten si dô. |
| 2843 | Duo sprach diu guote |
| 2844 | sante Clêmentis muoter: |
| 2845 | ‘owol dû, lieber maister mîn, |
| 2846 | mahtez mit dînen hulden sîn, |
| 2847 | nû ih hinnen sol varen, |
| 2848 | ich wolte gerne urloup hân |
| 2849 | zu ainem guoten wîbe, |
| 2850 | diu lange sich ist an dem lîbe. |
| 2851 | ir |
| 2852 | hai wi wol si ze mir getân hât!’ |
| 2853 | Duo sprach der heilige man: |
| 2854 | ‘wir suln ir gerne kunde hân, |
| 2855 | ê wir sceiden hinnen, |
| 2856 | haiz si uns vur bringen’. |
| 2857 | alse man die frouwen vur truoc, |
| 2858 | duo sprach der frône bote guot: |
| 2859 | ‘geloubest dû an got den guoten |
| 2860 | mit herzen unt mit muote?’ |
| 2861 | duo sprach diu frouwe: |
| 2862 | ‘wie gerne ih an in geloube!’ |
| 2863 | ‘geloubestû, daz sîn sun Christ |
| 2864 | unser |
| 2865 | ‘daz geloub ih’, sprach si, ‘gerne’ |
| 2866 | duo segente si der hêrre. |
| 2867 | er huop ûf sîne hant: |
| 2868 | do bescetwet si der hailant, |
| 2869 | diu frowe wart gesunt. |
| 2870 | er hiez ir geben goldes zehen phunt, |
| 2871 | er bevalh si ainem guoten man. |
| 2872 | duo wurden gote gehôrsam |
| 2873 | alle di dâ wâren, |
| 2874 | |
| 2875 | Dannen sciet der hailige man. |
| 2876 | die frouwen hiez er mit im varen |
| 2877 | Nicêtâ unt sîn pruoder Aquilâ |
| 2878 | di kômen im gegen dâ. |
| 2879 | do si die frouwen resâhen, |
| 2880 | si begunden under in frâgen, |
| 2881 | wer diu frowe wære |
| 2882 | di si unkunde sæhen. |
| 2883 | der hailige apostolus |
| 2884 | di rede huob er alsus: |
| 2885 | ‘ih wil iu sagen, wizze Christ, |
| 2886 | wer diu selbe frowe ist, |
| 2887 | unt wie ir |
| 2888 | si ist von Rôme geborn, |
| 2889 | zewâre sagen ih iu daz, |
| 2890 | des pesten chunnes des dâ was. |
| 2891 | ir friunt gâben si ainem man, |
| 2892 | bi dem si zwêne sune insamt gewan. |
| 2893 | ain pruoder habete der hêrre, |
| 2894 | der muote di frouwen sêre, |
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| 2895 | unkûske gert er dâ ze ir, |
| 2896 | sô si selbe sagete mir. |
| 2897 | daz was der frouwen lait, |
| 2898 | dannen kom si in arbait. |
| 2899 | deni kunige si sagete, |
| 2900 | daz si troum ersehen habete: |
| 2901 | diu kint wurden ir niemer ze êren, |
| 2902 | si nehieze si diu buoch lêren. |
| 2903 | ir man erloubete ir daz: |
| 2904 | diu kint sante si ze Athênas. |
| 2905 | duo vuoren si ze scuole. |
| 2906 | jâ tet ir lait genuoge |
| 2907 | des vâlandes man; |
| 2908 | ûf daz mer si entran. |
| 2909 | alle di an dem sceffe wâren |
| 2910 | di retrunken unt |
| 2911 | die unden wurfen di frowen ûz. |
| 2912 | duo kom si in ainer witiwen hûs. |
| 2913 | dâ vand ih sie clagende, |
| 2914 | michel nôt habende, |
| 2915 | ze allen zîten rief si sus: |
| 2916 | ‘lieber sun Faustînus, lieber sun Faustus! |
| 2917 | war sol ih sinnen |
| 2918 | nâh mînen lieben kinden?’ |
| 2919 | Nicêtâ unt sîn bruoder Aquilâ, |
| 2920 | ûf sprungen si sâ, |
| 2921 | ainander si an sâhen, |
| 2922 | duo si di rede vernâmen. |
| 2923 | si sprachen: ‘wol dû, hêrre trehtîn! |
| 2924 | waz sol dise rede sîn? |
| 2925 | wol dû, hêrre Pêter, |
| 2926 | der unser lieber maister! |
| 2927 | weder muowent uns troume? |
| 2928 | oder suln wir di rede gelouben?’ |
| 2929 | Duo sprach sante Pêter, |
| 2930 | der ir guote maister: |
| 2931 | ‘ez ensî daz wir |
| 2932 | alsô wir hie sizzen, |
| 2933 | ir sult ez vur wâr hân |
| 2934 | al daz ih iu gesaget hân’. |
| 2935 | si sprâchen: ‘wir birn iz, Faustînus unde Faustus’. |
| 2936 | der hailige apostolus |
| 2937 | der viel sîne venie. |
| 2938 | alsô petter hin ze himele: |
| 2939 | ‘wol dû, Christ hêrre, |
| 2940 | drîe chunige brâhten dir verre |
| 2941 | ir opfer von ir lanten, |
| 2942 | di dîn dâ vor niene rekanten, |
| 2943 | wan sô si nâch aim sternen muosen varn. |
| 2944 | alsô woldes dû bewarn |
| 2945 | diu kint in dem ellende. |
| 2946 | dû bist angenge unt der ende |
| Page 135 |
| 2947 | al des der ist, |
| 2948 | diu erde dîner barmunge ervullet ist’. |
| 2949 | er sprach zuo den kinden: |
| 2950 | ‘gruozet iwer gesinden! |
| 2951 | Clêmens ist iwer pruoder, |
| 2952 | diu frouwe ist iwer muoter. |
| 2953 | hie meget ir wol verstân: |
| 2954 | got hât iz durch wunder getân, |
| 2955 | daz manz wol scrîben mach |
| 2956 | unz an den jungisten tach’. |
| 2957 | Die gebruoder zesamen giengen: |
| 2958 | hai wi si ainander enphiengen! |
| 2959 | in got frouten si sih dô, |
| 2960 | si sprâchen |
| 2961 | diu muoter diu was muode. |
| 2962 | jâ wolten si die pruoder |
| 2963 | vor frouden reweket haben. |
| 2964 | duo sprach der heilige man: |
| 2965 | ‘si ist brôde an dem lîbe. |
| 2966 | nû bîtet ir ain wîle, |
| 2967 | ih wil iu den wech machen. |
| 2968 | ih entuon iz nieht ân |
| 2969 | Alsô diu frowe ûf sach, |
| 2970 | sanct Pêter ir zuo sprach: |
| 2971 | ‘wil dû an got |
| 2972 | sô solt dû die toufe loben, |
| 2973 | wil dû an dem gelouben denne vollestân |
| 2974 | sô maht dû zuo dem frônen tiske mit uns gân’. |
| 2975 | Duo sprach diu frowe: |
| 2976 | ‘wie gerne ih geloube, |
| 2977 | daz mih ain wârer got |
| 2978 | von niehte hât gebildôt! |
| 2979 | ih gloube, daz sîn sun Christ |
| 2980 | mîn |
| 2981 | in sînem namen tæte dû mih gesunt. |
| 2982 | jâ newart ich nie sô tump, |
| 2983 | mirne wæren unmære |
| 2984 | diu bôsen getroch diu ze Rôme wâren’. |
| 2985 | Duo sprach der bote frône: |
| 2986 | ‘want dû verlieze die stat ze Rôme |
| 2987 | und dîn edele chunne, |
| 2988 | dar zuo alle werltwunne, |
| 2989 | durch dîne kûske und durh dîne raine, |
| 2990 | und dû dih behielte ân maile, |
| 2991 | nû gebe dir got sîn rîche |
| 2992 | iemer untôtlîche |
| 2993 | durh dîn hailigez leben. |
| 2994 | dîne sun lâz ih dih sehen: |
| 2995 | hie ist Faustînus |
| 2996 | unt sîn bruoder Faustus, |
| 2997 | die hât dir got gehalten. |
| 2998 | nû solt dû an dînem alter |
| 2999 | mit michelen frouden sîn, |
| 3000 | daz gebiutet dir selbe mîn trehtîn’. |
| 3001 | Alsô der hailige apostolus |
| 3002 | volsprach Faustînus unt Faustus, |
| 3003 | diu frowe erniwet sih an der stunt, |
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| 3004 | daz alter kêrte sih in die jugent. |
| 3005 | nehaines mennisken zunge |
| 3006 | nemahte iu die michel wunne |
| 3007 | niemer vur bringen, |
| 3008 | gesagen noh gesingen, |
| 3009 | die si under in habeten. |
| 3010 | der muoter si duo sageten, |
| 3011 | waz in ze laide geschâhe, |
| 3012 | wie si versunken wâren, |
| 3013 | wie si ze ainem steken gebunden wâren, |
| 3014 | wie si ainem |
| 3015 | wæren aller êrist zuo komen: |
| 3016 | wie siu der hete betrogen, |
| 3017 | unz siu der wâre prophête |
| 3018 | dannen erlôset hête; |
| 3019 | wie si got erkanten. |
| 3020 | mit ûf erhaben hanten |
| 3021 | lobten si ir maister sanct Pêteren, |
| 3022 | der siu gesamenet hête. |
| 3023 | Duo sprach der hailige man: |
| 3024 | ‘iz hât got selbe getân, |
| 3025 | der heilige Christ, |
| 3026 | der ain samenâre ist |
| 3027 | des lîbes unde der sêle, |
| 3028 | dem geben wir lop unt êre’. |
| 3029 | Des andern morgenes vil fruo |
| 3030 | sanct Pêter gie ze dem mer duo. |
| 3031 | sîne jungere di hende twuogen, |
| 3032 | ir gebet si ûf huoben. |
| 3033 | si sâhen hin ze himele, |
| 3034 | si vielen ir venie, |
| 3035 | ze vil manigen stunden |
| 3036 | manten si got sîner wunden. |
| 3037 | Ein armer wart ir gewar, |
| 3038 | er slaich in nâh an daz |
| 3039 | ain armer |
| 3040 | |
| 3041 | er wolt an sîn wereh gân: |
| 3042 | do resach er den hailigen man. |
| 3043 | mit listen enthielt er sih allen den tac, |
| 3044 | daz er werkes niene phlac. |
| 3045 | ze jungist |
| 3046 | die rede huob er alsus an: |
| 3047 | ir birt hêrren alsô rîch; |
| 3048 | dûht iz iuh niht versmæhlîch, |
| 3049 | sô gruozt ih iuh gerne. |
| 3050 | nû vurht ih vil sêre, — |
| 3051 | want ih pin ain arm man — |
| 3052 | daz ir iz ze |
| 3053 | Duo antwurte im sus |
| 3054 | der heilige apostolus: |
| 3055 | dîn gruozzen ist uns vil liep, |
| 3056 | durh dîn armuot versmâhen wir dîn niet. |
| 3057 | uns gebiutet mîn trehtîn, |
| 3058 | daz wir gerne durh in arm sîn, |
| Page 137 |
| 3059 | swer im wil dienen, |
| 3060 | im |
| 3061 | arm unde rîche: |
| 3062 | er enphæhet siu alle gelîche’. |
| 3063 | Duo sprach der altman: |
| 3064 | ‘Pêter, ain rede wolt ih gerne mit dir hân. |
| 3065 | hêtet ir under iu |
| 3066 | des wolt ih iuh vil wol bescaiden. |
| 3067 | ih pin ain wol gelêrter man, |
| 3068 | in manigen guoten listen ih mich verstân: |
| 3069 | hête aver ih dehain |
| 3070 | nû hôrt ih vil gerne, |
| 3071 | wie dû mih des bescaiden woltest, |
| 3072 | want dûz von rehte tuon soltest, |
| 3073 | ob dir mîn rede wære liep. |
| 3074 | nist aver des niet: |
| 3075 | ist dir mîn rede lait, |
| 3076 | sô gân ih wider an mîn arbait |
| 3077 | unt rede mit dir niht mêre. |
| 3078 | ih vurhte aver, daz iz dih geriwe vil sêre’. |
| 3079 | Duo sprach der hailige man: |
| 3080 | ‘unser urloup solt dû hân. |
| 3081 | hâst dû iht gehôret oder gesehen, |
| 3082 | daz dich tunke von dem wege, |
| 3083 | dar umbe |
| 3084 | swie sô dir gevalle. |
| 3085 | redes dû iht des nuzze ist, |
| 3086 | wie willekomen dû uns pist! |
| 3087 | ist iz joh niht nuzze, |
| 3088 | dannoh skônen wir dîner wizze |
| 3089 | und suln dîn guote friunt sîn. |
| 3090 | habe uns rehte sam die sun dîn’. |
| 3091 | Duo sprach der altman: |
| 3092 | ‘Pêter, daz ih allen disen tach muozech gân, |
| 3093 | daz wil ih dir rehte sagen, |
| 3094 | war umbe ih daz getân hân. |
| 3095 | du erbarmest mir harte. |
| 3096 | duo ih des gewarte, |
| 3097 | daz ir sô hie bettet: |
| 3098 | hie nesint gotte noh stette, |
| 3099 | noh neist nehain |
| 3100 | gerst dû denne ihtes mêre, |
| 3101 | danne dû von der |
| 3102 | sô bist dû ain wunderlîch man. |
| 3103 | wænestû, daz dir iemer iht mege gescehen, |
| 3104 | wan alsô dir diu |
| 3105 | des verstân ih alle wîle |
| 3106 | an mîn selbes lîbe: |
| 3107 | daz gebet nehain frum ist, |
| 3108 | noh undervert niemer mennisken list, |
| 3109 | diu |
| 3110 | daz wil ih wol bewæren’, sprach der altman. |
| Page 138 |
| 3111 | Clêmens sprach dô: |
| 3112 | ‘jâ sprichet der hêrre Plâtô: |
| 3113 | ‘swaz von gote ist ensprungen, |
| 3114 | des ist selten zerunnen’. |
| 3115 | vater, getorst ih dih frâgen, |
| 3116 | wâ dîn |
| 3117 | oder wannen dû wârest geborn. |
| 3118 | du hâst dîn alter her wol rezogen’. |
| 3119 | Duo sprach der altman: |
| 3120 | ‘waz sol ich dir von mîner |
| 3121 | oder von dehainer mîner geburte? |
| 3122 | mîner rede sol man ê antwurten, |
| 3123 | werde uns hernâch diu stunde, |
| 3124 | sô sagen ainander ze kunde’. |
| 3125 | Der gotes bote frône |
| 3126 | antwurt im scône: |
| 3127 | ‘wir suln dih wol enphâhen, |
| 3128 | genc her nâher. |
| 3129 | dû bist in guoten wizzen, |
| 3130 | zuo mir solt dû sizzen. |
| 3131 | dû bist ain wol gelêrt man’; — |
| 3132 | alsus vie er die rede an — |
| 3133 | ‘swer die wârhait lêret, |
| 3134 | braitet unde mêret, |
| 3135 | und wuochert der mennisken sêle, |
| 3136 | der lûhtet iemer mêre |
| 3137 | sam der |
| 3138 | er hât got gewuochert unde gewunnen, |
| 3139 | daz er untôtlîche |
| 3140 | wonet iemer in dem gotes rîche; |
| 3141 | des wir urkunde haben. |
| 3142 | jâ scrîbent uns die wîssagen: |
| 3143 | ‘swer ain grôzze stat |
| 3144 | ûf ain hôhen berch gezimpert hât, |
| 3145 | die nesol man niht verbergen, |
| 3146 | sunder verre gesehen werden; |
| 3147 | noh enzundet nieht sîn liehtvaz, |
| 3148 | daz er iz under den |
| 3149 | sunder sezze ûf daz |
| 3150 | daz iz lûhte uber al’. |
| 3151 | Duo sprach der althêrre: |
| 3152 | ‘diu rede ist mir verre. |
| 3153 | dîner wîssagen verstân ih niet, |
| 3154 | ain ander rede wære mir liep: |
| 3155 | in den puochen dâ ih inne |
| 3156 | diu ih von mîner maisterscefte verstân, |
| 3157 | diu wil ih dir vur legen. |
| 3158 | Pêter, kanstu |
| 3159 | ode wil dû mir iht vur legen? |
| 3160 | ih wil dir gerne antwurte geben’. |
| 3161 | Duo sprach der gotes trût: |
| 3162 | ‘rede dû uber lût |
| Page 139 |
| 3163 | swaz sô dir gevalle: |
| 3164 | man antwurtet dir gerne danne’. |
| 3165 | ‘Pêter, ih spriche, |
| 3166 | daz nehain got die werlt rihte |
| 3167 | noh sie niht |
| 3168 | unt daz der uppik arbaite, |
| 3169 | der in der werlt ihtes gere, |
| 3170 | wan alsô ime diu |
| 3171 | in swelher |
| 3172 | diu muoz iemer uber in komen, |
| 3173 | er muoz iemer |
| 3174 | alsô lange er scol leben, |
| 3175 | er nemach niht vurbaz. |
| 3176 | unt widerredestû daz, |
| 3177 | sô antwurt ich dir denne |
| 3178 | alsô ih di rede erkenne’. |
| 3179 | Nicêtâ dar vur trat, |
| 3180 | den maister er urloubes pat. |
| 3181 | ‘maister’, sprach er, ‘liebe, |
| 3182 | daz wil ih iemer gerne dienen. |
| 3183 | diu rede diu ist suozze, |
| 3184 | daz ih ir antwurten muozze’. |
| 3185 | Duo sprach der hailige man: |
| 3186 | ‘wie wol ih dir sîn gan! |
| 3187 | antwurte dû im ze stunde |
| 3188 | alsô dir der hailige keist sende ze munde’. |
| 3189 | Duo kêrte er sich zu dem alten man, |
| 3190 | er sprach: ‘vater, dû ensolt iz niht ze |
| 3191 | daz ain tumper jungelinch |
| 3192 | versuochet alsus grôzziu dinch |
| 3193 | ze ainem althêrren. |
| 3194 | iz enmach dir niht gewerren: |
| 3195 | vor frävele ih iz niht entuon, |
| 3196 | wan alsô hin ze dem vater ain sun. |
| 3197 | uberwindestû mih mit rede, |
| 3198 | ih pin gerne in dîner phlege’. |
| 3199 | Duo sprach der alte man: |
| 3200 | ‘kint, in swiu dû kunnest fur gân, |
| 3201 | wel dû dir ûzer siben listen frîen |
| 3202 | daz dir aller beste in |
| 3203 | daz ist mir liep. |
| 3204 | gezwîfelest aver dû an dir selbem iet, |
| 3205 | hâstû dehainen gesellen, |
| 3206 | die dir dar zuo helfen wellen, |
| 3207 | die vindent mih gerehten. |
| 3208 | wider ders wârheite newil ih niht vehten |
| 3209 | wan in der besten mâze. |
| 3210 | ain mittel suln wir dar under lâzen, |
| 3211 | daz man unser rede |
| 3212 | baidenthalp wol |
| 3213 | Duo sprach Nicêtâ: |
| 3214 | ‘vater, ih eroffene dir nû sâ, |
| 3215 | daz mih Epicûrus gezogen hât |
| 3216 | unt ainen mînen bruoder, der hie stât. |
| Page 140 |
| 3217 | den dritten zôch gewis |
| 3218 | Plâtô und Aristôtilis. |
| 3219 | nû wel dû dir ûz den allen |
| 3220 | swaz so dir gevalle, |
| 3221 | dar dih dîn sin laite, |
| 3222 | hie vindest dû uns geraite. |
| 3223 | des suln die hôrâre jehen, |
| 3224 | ob wir dir iht geantwurten megen. |
| 3225 | wir nedurfen sîn nehain laster haben, |
| 3226 | uberredet uns ain sô alter man’. |
| 3227 | Duo sprach sancte Pêter der hailige man: |
| 3228 | ‘von der |
| 3229 | daz tunket mih guot: |
| 3230 | dannen er die rede erhuop, |
| 3231 | daz wir des ze ende komen’. |
| 3232 | die liute begunden alle sancte Pêteren loben. |
| 3233 | alsô si erkanten den gotes trût, |
| 3234 | si riefen alle uber lût: |
| 3235 | ‘willekomen sîst dû, hêrre! |
| 3236 | lop unde êre |
| 3237 | muostû iemer mêr hân, |
| 3238 | daz dû komest in Judêam’. |
| 3239 | Nicêtâ |
| 3240 | huop die rede sâ: |
| 3241 | ‘swaz êweclîchen stât, |
| 3242 | daz ist allez ainvalt, |
| 3243 | swaz menige scol hân, |
| 3244 | daz muoz allez zegân, |
| 3245 | swaz mit menige scol gestên, |
| 3246 | daz muoz allez zegên. |
| 3247 | al daz man getailen mach, |
| 3248 | daz enhat nehain êwechlîche chraft. |
| 3249 | swaz ainvalt ist und aine, |
| 3250 | daz enmach niemen getailen, |
| 3251 | noh enmach niemen verwenden: |
| 3252 | iz enhât angenge noh ende. |
| 3253 | wellestû guot maister sîn, |
| 3254 | sô nim in den muot dîn: |
| 3255 | al daz ainvalt ist, |
| 3256 | daz enbeweget niemer mennisken list. |
| 3257 | wie solt man daz verwenden, |
| 3258 | des niemen waiz ende, |
| 3259 | noh anegenges niene hât |
| 3260 | unt ân |
| 3261 | daz ist |
| 3262 | hât iz aver skephære, |
| 3263 | sô muoz iz wol zergân, |
| 3264 | sol iz skephære hân. |
| 3265 | von dannen ist der engel bewegelîch, |
| 3266 | von dannen ist der menniske tôtlîch. |
| 3267 | al daz êwechlîchen stât, |
| 3268 | nehein angenge iz hât |
| 3269 | noh enhât endes niet. |
| 3270 | vater, swenne dir nû sî liep, |
| 3271 | sô solt dû mir antwurte geben, |
| 3272 | ob dû iz wellest widerreden’. |
| 3273 | Duo sprach der altman: |
| Page 141 |
| 3274 | ‘sun, dû bist maisterlîchen vur gevarn. |
| 3275 | alsô lange sô ih lebe |
| 3276 | so gehôrt ih nie bezzer rede |
| 3277 | von dehainem jungelinge: |
| 3278 | dû |
| 3279 | der ainvalt ih niht verstên kan, |
| 3280 | von der |
| 3281 | ‘Wil dû von der wîlsælde rede hân’, — |
| 3282 | sprach der junge man — |
| 3283 | ‘diu rede ist underskaiden, |
| 3284 | die muoz wir in driu tailen: |
| 3285 | weder si ie wære, |
| 3286 | ode si habe schepfære, |
| 3287 | ode wie si sî gescaffen. |
| 3288 | vater, daz kan ih dir wol geoffen’. |
| 3289 | Duo sprach der altman: |
| 3290 | ‘sun, die rede lâ fur gân!’ |
| 3291 | Duo sprach der junge man: |
| 3292 | ‘ih wil dir wêrlîchen sagen: |
| 3293 | diu werlt hât ain |
| 3294 | der zweier wil ih |
| 3295 | von dem si anegenge hât, |
| 3296 | in des |
| 3297 | er ist schepfære der tugende, |
| 3298 | alle dinc megende, |
| 3299 | er îst vater aller guote, |
| 3300 | er hât in sîner huote |
| 3301 | al daz in dirre werlt ist. |
| 3302 | nû antwurte, ob dû wellist’. |
| 3303 | Duo sprach der alte: |
| 3304 | ‘die rede maht dû ain wol gehalten. |
| 3305 | hête diu werlt schepfære, |
| 3306 | unde weste ih, wer er wære, |
| 3307 | sô wolt ih noh zu im komen. |
| 3308 | dîn rede ist unvernomen, |
| 3309 | daz si schepfære habe. |
| 3310 | vurwâr ih dir sage: |
| 3311 | ih enlâze mih des niemen uberreden, |
| 3312 | swaz dem menniscen sol geschehen, |
| 3313 | er nemach sih es mit nihte bewaren: |
| 3314 | daz wil ih bewæren unde behaben. |
| 3315 | ih verstên an mir selbem sô manigiu dinch, |
| 3316 | diu unrehte geordenet sint, |
| 3317 | diu niemer mähten geschehen, |
| 3318 | scolte schepfære wesen. |
| 3319 | solte mih schephære bewaren, |
| 3320 | waz mähte mir danne gescaden? |
| 3321 | mih enmach behuoten |
| 3322 | diu ubel noh diu guote, |
| 3323 | wan alsô diu wîlsælde wil. |
| 3324 | liute |
| 3325 | ertrinkent unde werdent erslagen; |
| 3326 | der dinge mäht ich dir menigiu sagen, |
| Page 142 |
| 3327 | ob dîn rede wâr wære, |
| 3328 | diu der niemer geschæhen; |
| 3329 | wande sô verhancte sîn der |
| 3330 | wil dû iht reden, daz ist mir liep’. |
| 3331 | Duo sprach Nicêtâ: |
| 3332 | ‘daz bewære ih nû sâ. |
| 3333 | ist daz ih vor dînen hulden getar, |
| 3334 | dîne rede |
| 3335 | daz si alle noh hiute jehent hie bî: |
| 3336 | daz dû sprichest daz wîlsælde sî, |
| 3337 | iz nehât nehainer slahte craft, |
| 3338 | sunder elliu disiu werlt stât |
| 3339 | under aim skephære. |
| 3340 | daz wil ih behaben und bewæren’. |
| 3341 | Duo sprach der althêrre: |
| 3342 | ‘die rede hôr ih gerne’. |
| 3343 | ‘Vater, dû bist des wol ze ende komen: |
| 3344 | diu mennisken werdent elliu |
| 3345 | di wil iz ist kindelîn, |
| 3346 | so nemach dâ sinnes niht sîn. |
| 3347 | sô ziuhet man iz tanne, |
| 3348 | unz iz sih piledet ze manne. |
| 3349 | wil man iz wol beruochen, |
| 3350 | sô sezzet manz zu den buochen, |
| 3351 | oder lêret iz swaz man wil; |
| 3352 | der |
| 3353 | |
| 3354 | iz grîfet an die |
| 3355 | wil iz aver bôslîchen frî gân, |
| 3356 | dû sprichest, iz habe diu wîlsælde getân. |
| 3357 | man lêret diu kint durch daz guote liste, |
| 3358 | daz si sih in dem alter der mit fristen, |
| 3359 | der man |
| 3360 | daz er mege deste baz. |
| 3361 | ist er dem liute nuzze und guot, |
| 3362 | daz man im danne sam tuot. |
| 3363 | grîfet er aver an die ubele, |
| 3364 | sô mizzet man im hin widere |
| 3365 | al die selben mâze. |
| 3366 | dem mennisken ist hie |
| 3367 | daz er sînem scephære |
| 3368 | wider antwurte die sêle. |
| 3369 | wil der menniske sih selben niht erkennen, |
| 3370 | sô muoz diu helle brennen |
| 3371 | die sêle iemer dar inne. |
| 3372 | daz sint allez mennisken sinne. |
| 3373 | war ist dîn wîlsælde dâ komen? |
| 3374 | diu ist wærlîchen gar verkorn. |
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| 3375 | nû sprichestû, iz sul sîn; |
| 3376 | nû antwurt ouh dû der rede mîn’. |
| 3377 | Duo sprach der althêrre: |
| 3378 | ‘sun, dû hâst scône lêre. |
| 3379 | dîn rede ist genuoch suoze, |
| 3380 | |
| 3381 | si nemac dir nehain frum sîn: |
| 3382 | ih |
| 3383 | jâ hôrt ih dih jehen ê, |
| 3384 | daz elliu dise werlt stê |
| 3385 | under aim |
| 3386 | kint, nû solt dû mir sagen, |
| 3387 | ob dîn |
| 3388 | daz dehain menniske dem andern iht ubeles getuot, |
| 3389 | daz solt er bewarn, |
| 3390 | daz iemen den andern mähte erslahen, |
| 3391 | noh an nihte mähte misseschehen. |
| 3392 | waz guotes mähte ih von ime jehen? |
| 3393 | waz |
| 3394 | sô er die ubele muoz verhengen? |
| 3395 | hêt ih under mir ainen chneht, |
| 3396 | der mir dienestes wære gereht, |
| 3397 | swaz ih in tuon hiezze, |
| 3398 | wi getorst er daz |
| 3399 | dû sagest, |
| 3400 | diu werlt hab ain scephâre: |
| 3401 | hât er die werlt gescaffen, |
| 3402 | sô solt er si ouh machen, |
| 3403 | daz diu liute wæren gelîch, |
| 3404 | alle |
| 3405 | etelîcher hât armuot, |
| 3406 | sô ist der ubel, sô ist der guot; |
| 3407 | ir iegelîch ziuhet sîn lîp |
| 3408 | alsô im diu wîlsælde gît. |
| 3409 | du newellest ain ander rede hân, |
| 3410 | diu wîlsælde mac noh wol ganz bestân’. |
| 3411 | Duo sprach Nicêtâ: |
| 3412 | ‘daz besceide ih dir nû sâ. |
| 3413 | got der ist scephære |
| 3414 | himeles unde erde, |
| 3415 | und aldaz daz bevangen hât, |
| 3416 | nihtes niht ân in nestât. |
| 3417 | wi erz aver habe besceiden, |
| 3418 | daz wil ih dir hie zestete zeigen. |
| 3419 | elliu mennisken kint |
| 3420 | in ainer frîhait sint. |
| 3421 | er hât in lâzen ain |
| 3422 | ainer |
| 3423 | grîfet zu maniger guote |
| 3424 | mit hercen und mit muote, |
| 3425 | hât got vor ougen, |
| 3426 | rekennet sîne tougen, |
| 3427 | frowet sih guoter dinge, |
| 3428 | der hât die besten sinne, |
| 3429 | want der scephær reht rihtære ist, |
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| 3430 | den behaltet er in sîner |
| 3431 | der wirt den engelen gelîch, |
| 3432 | frowet sih iemer êweclîch. |
| 3433 | ain ander dar engegene |
| 3434 | flîzet sih aver der ubele, |
| 3435 | wi er unchûsclîchen gelebe, |
| 3436 | wi er ubermuote gephlege, |
| 3437 | wie er den reslahe, |
| 3438 | wi er dem beneme sîne habe, |
| 3439 | wie er den verrâte, |
| 3440 | frowet sih ubeltæte, |
| 3441 | uobet ze allen stunden |
| 3442 | houbethafte sunde. |
| 3443 | wir haben under uns wâre wîssagen, |
| 3444 | die |
| 3445 | under den haiden sint rehte philosophî, |
| 3446 | die |
| 3447 | under die wâren gotes boten |
| 3448 | sint trugenâre komen, |
| 3449 | under die gotes lêrære |
| 3450 | die |
| 3451 | in der toufe hêre |
| 3452 | sint |
| 3453 | ainer wil die luge |
| 3454 | der ander wil an der wârhaite bestân. |
| 3455 | nû tuo dû, vater, sam ain wîse man, |
| 3456 | der di |
| 3457 | wel dir daz peste tail, |
| 3458 | gewin dir wider dîn hail, |
| 3459 | île an den rehten wek, |
| 3460 | mache dir bruke unde stek: |
| 3461 | so nâhet dir daz gotes rîche. |
| 3462 | dâ frowest dû dih iemer êwechlîche. |
| 3463 | der rede wil ih ze dir |
| 3464 | vil scône neic er dem altman. |
| 3465 | Aquilâ dar vur gie, |
| 3466 | die rede er alsus an vie: |
| 3467 | ‘vater ‘, sprach er, ‘newær iz dir niht swære, |
| 3468 | ih berihte dih der |
| 3469 | Duo sprach der althêrre: |
| 3470 | ‘ih pin gevarn verre, |
| 3471 | sô mir nie nehaîn man |
| 3472 | niht bezzers der von kunde gesagen, |
| 3473 | wan alsô ih an den buochen gelesen hân, |
| 3474 | daz diu |
| 3475 | maht aver dû mit dînen sinnen |
| 3476 | mih in aine bezzer rede bringen, |
| 3477 | unt ist daz ih die warhait erkenne, |
| 3478 | sô volge ih dir denne’. |
| 3479 | ‘Vater ‘, sprach er, ‘dû solt mîn rede rehte vernemen. |
| 3480 | daz ist dikke an der erde geschehen, |
| 3481 | daz zwêne rîche kunige |
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| 3482 | lebeten samt ubele, |
| 3483 | daz si gerne ainander scanten |
| 3484 | mit roube unt mit brante. |
| 3485 | ze jungest samenten si sich mit menige, |
| 3486 | si kômen ainander engegene, |
| 3487 | si vâhten ir |
| 3488 | da verlôs manic man den lîp, |
| 3489 | dâ wurden lîhte zehen tûsent erslagen, |
| 3490 | wie maht daz ain |
| 3491 | daz si in ainer wîle wurden geborn, |
| 3492 | und in ainer wîle doch den lîp hânt verlorn? |
| 3493 | nû mîn vil lieber hêrre, |
| 3494 | nû vernim ouh mêre: |
| 3495 | wâ ist ain offen |
| 3496 | daz liut samenet sih dar, |
| 3497 | dar komt maniger slahte wîp unt man |
| 3498 | und muozzen an ein schef gân, |
| 3499 | die wîten gesament sint: |
| 3500 | sô hevet sih ain ungemacher wint, |
| 3501 | unde ertrinket aldaz dar inne ist. |
| 3502 | hêrre, sô wol sô dû gelêret pist, |
| 3503 | daz dû daz niene wil verstên, |
| 3504 | wie daz von aîner |
| 3505 | wie si in ainer wîle mähten geborn werden, |
| 3506 | und iedoch in ainer wîle muozen sant ersterben. |
| 3507 | getorst ih dih es ermanen, |
| 3508 | ih nahte dir manigiu dinch sagen, |
| 3509 | diu dîner wîlsælde |
| 3510 | alle widerwärtic wæren. |
| 3511 | und woltes dû mirs denne jehen, |
| 3512 | so nemahtes dû mit der wârhaite dar wider niht gereden’. |
| 3513 | Duo sprach der altman: |
| 3514 | ‘liebe, ih kan dirz allez paz gesagen, |
| 3515 | denne dû iz selbe kunnest verstên: |
| 3516 | diu wîlsælde muoz ie regên. |
| 3517 | dû bist noh ain jungez kint, |
| 3518 | der |
| 3519 | under tage unde under naht. |
| 3520 | ir iegelîch hât ir chraft, |
| 3521 | ir newirt minre noh mêre, |
| 3522 | si neverwandelent sich nie mêre, |
| 3523 | si sint alle gelîch lanch. |
| 3524 | sun, nim in dînen gedanch: |
| 3525 | wi mahte menniske von sînen listen |
| 3526 | ir lauf dar under gefristen? |
| 3527 | daz bewârt dir Pytâgoras: |
| 3528 | diu wîle diu vor tûsent jâren was, |
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| 3529 | wil dû dar nâh arbaiten, |
| 3530 | ienoh hiute vindestû sie geraite. |
| 3531 | zewâre sagen ih dir daz: |
| 3532 | hêtestû ain tail |
| 3533 | so wære dir astronomia in |
| 3534 | dû sprichest ouh, daz alt und junge |
| 3535 | ze aim |
| 3536 | nû lâ zehenzech tûsent den lîp haben verlorn: |
| 3537 | swelher ie dâ tôt lac, |
| 3538 | daz was sîn |
| 3539 | er nemahtes niht uber werden, |
| 3540 | swelhes tôdes er solt ersterben. |
| 3541 | er retrinke oder werde reslagen, |
| 3542 | diu wîle muoz in dar tragen, |
| 3543 | alsô iz dar inne gestê. |
| 3544 | daz |
| 3545 | die die himele rihtent |
| 3546 | und die |
| 3547 | und ir iegelîh bisunder |
| 3548 | |
| 3549 | unde muoz ir zît durh gân. |
| 3550 | da nekanst dû mir niht von gesagen. |
| 3551 | in den puochen pin ih gezogen: |
| 3552 | zewâr diu wîlsælde muoz ie dem mennisken komen, |
| 3553 | swaz im der von solt geskehen. |
| 3554 | kint, wil dû iht anders mit mir reden?’ |
| 3555 | Der junge sah den alten an, |
| 3556 | er sprach: ‘wie ob ih dih erman |
| 3557 | ettelîcher dinge, |
| 3558 | ist iz mit dîner minne, |
| 3559 | daz dû der wîlsælde ab gêst, |
| 3560 | dâ dû hiute sô vaste an stêst?’ |
| 3561 | Do sprach der althêrre: |
| 3562 | ‘die rede hôr ih gerne’. |
| 3563 | ‘Unser althêrren |
| 3564 | |
| 3565 | daz si ettelîh wunder vur brêhten, |
| 3566 | dâ man ir iemer bî gedêhte; |
| 3567 | philosophi gwisse vunden |
| 3568 | wîle unde stunde, |
| 3569 | duo der hêrre Pytagoras |
| 3570 | in di hôhe der himele maz, |
| 3571 | daz wâren grôze sinne, |
| 3572 | sô menniske niht bezzers mahte vinden. |
| 3573 | si wâren alle wîse genuoch: |
| 3574 | der aver den wîstuom truoch, |
| 3575 | daz himel und erde gescaffen wart, |
| 3576 | und alle di werlt in sînem |
| 3577 | den di engel lobent in dem himele, |
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| 3578 | und elliu sîn gescaft hie nidere |
| 3579 | vurhtet unt êret; |
| 3580 | unde die er selbe denne hât gelêret, |
| 3581 | unt in eroffenet hât sîne tougen, |
| 3582 | dem sculn wir mêr glouben: |
| 3583 | ir lêre sculn wir vesten unde tragen, |
| 3584 | von der wîlsælde wil ih noh rede haben. |
| 3585 | dannen dû êrst begundest reden, |
| 3586 | dannen wil ih dir gerne ain ende geben. |
| 3587 | Vater, wil dû mir sagen: |
| 3588 | mac ain wîp zwuo |
| 3589 | hâstû daz iender gelesen? |
| 3590 | mac si zwaier kinde insamt genesen?’ |
| 3591 | Duo sprach der alte man: |
| 3592 | ‘siben |
| 3593 | dâ vur nemac si niht komen, |
| 3594 | oder uns habent dai buoch gelogen’. |
| 3595 | Der junge sprach dô: |
| 3596 | ‘der rede pin ih frô, |
| 3597 | daz dû mir selhe gihest, |
| 3598 | daz diu wârhait dâ ist. |
| 3599 | sô denne daz wîp |
| 3600 | gêt unze an ir zît, |
| 3601 | so gewinnet si zwai kindelîn, |
| 3602 | iz pruoder oder swester sîn. |
| 3603 | der aine wirt ain guot man, |
| 3604 | dem liute liep unt lobesam, |
| 3605 | der ander wirt ain scâchære oder ain diep: |
| 3606 | daz enist doh der wîle scult niet. |
| 3607 | der durh maintât wirt erhangen, |
| 3608 | daz ist durh sîn ubel ergangen; |
| 3609 | sô wirt der ander kûske unt raine. |
| 3610 | vater, wie wil dû nû ertailen, |
| 3611 | daz daz von der |
| 3612 | und doch in ainer wîle sîn geborn? |
| 3613 | wil dûs mînen rât hân, |
| 3614 | der rede maht dû wol abe gân. |
| 3615 | dû hâst den unrehten wech begriffen, |
| 3616 | mit dînem glouben pistu |
| 3617 | Duo sprach der altman: |
| 3618 | ‘der rede ih wol geantwurten chan. |
| 3619 | scol ain wîp zwaier kinde genesen, |
| 3620 | dâ muoz wîle under wesen. |
| 3621 | sô si aines kindes enpristet, |
| 3622 | wie ob diu wîle gar erlisket, |
| 3623 | ê daz ander werde geborn. |
| 3624 | iz mac vil lihte sô komen, |
| 3625 | daz sih diu wîle verwandelen mach |
| 3626 | bidaz dir daz ouge gît den |
| 3627 | die rede sculn wir dâ lâzen. |
| 3628 | die di himele hie vor mâzen, |
| 3629 | die wâren wîse philosophî: |
| 3630 | ih enwaiz ob nû iemen lebendich sî, |
| 3631 | der von sînem sinne |
| 3632 | sô getânes iht vur bringe, |
| 3633 | sô si uns an habent prâht. |
| 3634 | dû hâst dih es unrehte bedâht, |
| 3635 | daz dû diu buoch wil widerreden: |
| 3636 | du nekanst der rede nehain ende geben’. |
| 3637 | Duo sprach der junge: |
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| 3638 | ‘owî vater, wi wol ih dir gunde, |
| 3639 | woldes dû die ainvalde gehaben, |
| 3640 | unde gelouptest an ain wâren wîssagen: |
| 3641 | |
| 3642 | |
| 3643 | si megen uns lîhte entrinnen; |
| 3644 | woltest dû dîner sêle gewinnen |
| 3645 | ain êwige |
| 3646 | diu dir wære nuzze und guot, |
| 3647 | erweltest dir daz beste, |
| 3648 | gewunnest dir ain gruntfeste, |
| 3649 | diu dir niemer mähte entwîchen, |
| 3650 | sô tætestû wîslîchen’. |
| 3651 | Duo sprach der altman — |
| 3652 | mit fiurunden ougen sah er in an — : |
| 3653 | ‘wie mähte ih von mînen sinnen |
| 3654 | mir daz beste tail gewinnen? |
| 3655 | hâstû ain muot, |
| 3656 | der dunchet mih niht guot; |
| 3657 | sam dunket dich lîhte der mîn: |
| 3658 | daz muoz uber elliu mennisken sîn. |
| 3659 | diu werlt ienoh hiute stât |
| 3660 | sô si von allerêrste wart. |
| 3661 | si newirt niemer wirs noh paz, |
| 3662 | wan sô si ze allerêrste was. |
| 3663 | dâ nnuoz der menniske inne leben: |
| 3664 | swaz im diu wîlsælde wil geben, |
| 3665 | des nemach er nîemer uber werden |
| 3666 | in telern noh in pergen |
| 3667 | mit dehainer slahte were. |
| 3668 | fliuht er ûf daz mere, |
| 3669 | ist iz ie diu |
| 3670 | so retrenket in diu unde. |
| 3671 | diu wîlsælde muoz ie uber in regân; |
| 3672 | daz wil ih noh bewæren’ sprach der altman. |
| 3673 | Ûf stuont duo Clêmens, |
| 3674 | den maister bat er urloubes, |
| 3675 | daz er rede muose hân. |
| 3676 | er kêrte sih zuo dem alten man, |
| 3677 | er sprach: ‘vater, newære iz dir niht swære, |
| 3678 | ih wolte dih gerne ain luzzel frâgen’. |
| 3679 | ‘zewâre’, sprach er, ‘sun, |
| 3680 | daz maht dû vil wol tuon’. |
| 3681 | erkennest aver dû under den haiden |
| 3682 | ir maniger gote dehainen?’ |
| 3683 | ‘der erkenne ih’, sprach er, ‘manige. |
| 3684 | dannen ih dir genuoch hân ze sagene’. |
| 3685 | Clêmens sprach: ‘gescah dir daz noh ie, |
| 3686 | daz dû dîn oppfer bræhtest vur sie?’ |
| 3687 | Duo sprach der alte man: |
| 3688 | ‘daz hân ih dikke getân, |
| 3689 | swâ iz diu wîlsælde versûmet hât. |
| 3690 | wirt mîn iemer mêr dehain rât, |
| 3691 | ih ervullez vil gerne, |
| 3692 | ih getrûwe in vil verre’. |
| 3693 | Duo sprach Clêmens: |
| 3694 | ‘harte wunderet mih des, |
| 3695 | daz dû vur dîne gote gienge |
| 3696 | unde vor in nider fiele. |
| Page 149 |
| 3697 | dîn oppfer bræht dû in ir hûs: |
| 3698 | |
| 3699 | tâten si dir iht genâden? |
| 3700 | getar ih dih des gefrâgen?’ |
| 3701 | ‘Ettewenne‘, sprach der altman, |
| 3702 | ‘hânt si ubel ze mir getân, |
| 3703 | ettewenne wol, |
| 3704 | alsô iz ie denne kom. |
| 3705 | uns gebiutet unser ê, |
| 3706 | daz wir opfern Lûnê |
| 3707 | beidiu ol unde wîn: |
| 3708 | dar umbe wil si uns di naht vor sîn. — |
| 3709 | ad templum Martis, |
| 3710 | der ist ain grôzer got vil gewis, |
| 3711 | dem opfern wir skilte unt swert, |
| 3712 | grôzer êren ist er wert: |
| 3713 | swen er wil bewaren, |
| 3714 | dem nemac menniske niemer gescaden. |
| 3715 | Mercûrîus der mære |
| 3716 | der ist ain got seltsæne: |
| 3717 | er wil, daz in die chaufliute |
| 3718 | vor andern goten triuten. — |
| 3719 | Jôvî dem hêrren |
| 3720 | dem gezimt grôz êre: |
| 3721 | dem oppfern wir zewâre |
| 3722 | mit bogen unt mit strâlen. |
| 3723 | læt er sînen zorn vur gân, |
| 3724 | niht lemtiges mac dâ vor bestân. — |
| 3725 | Vênerî der frowen, |
| 3726 | der suln wir aller êren wol getrûwen. |
| 3727 | der oppfern wir pluomen unt vingerlîn; |
| 3728 | in ir hulden wil ih gerne sîn. |
| 3729 | unser |
| 3730 | si gebiutet uns umbe die hîrât. — |
| 3731 | Saturnô dem wilden |
| 3732 | oppfern wir mit |
| 3733 | alle gote nemegen uns niht bewaren, |
| 3734 | wil er aine uns scaden. |
| 3735 | der hêrre wil, daz im mit golde |
| 3736 | opfern sîne holden. |
| 3737 | dar umbe gît er uns sunnen |
| 3738 | und maniger slahte wunne. |
| 3739 | der ander gote der ist vil, |
| 3740 | der ih nû nennen niene wil, |
| 3741 | die wir ze Rôme emphangen hân. |
| 3742 | in aimme jâre nemahte ih dir ir tugent niht gesagen’. |
| 3743 | Duo sprach Clêmens der jungelinch: |
| 3744 | ‘dizze sint wunderlîchiu dinch. |
| 3745 | ûzer dîn selbes munde |
| 3746 | sô uberrede ih dich hie zestunde |
| 3747 | dîner wunderlîcher site. |
| 3748 | waz erwurve dû der mite, |
| 3749 | daz dû vur dîne gote gienge |
| 3750 | und vor in nider viele? |
| 3751 | wes mahten dîh dîne gote geweren, |
| 3752 | sô dir diu wîlsælde scol gescehen? |
| 3753 | diu wîlsælde muoz liegen, |
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| 3754 | oder di gote triegen. |
| 3755 | muotest dû ihtes dâz in, |
| 3756 | daz muoz wider di wîlsælde sîn; |
| 3757 | wil dû aver die wîlsælde gehaben, |
| 3758 | sô muostû die gote lâzen varn. |
| 3759 | in iewederen taile bistu betrogen: |
| 3760 | nu nemaht du |
| 3761 | Do |
| 3762 | erne antwurte im niht mêre, |
| 3763 | vor zorne wolt er dane gân: |
| 3764 | do behabet in sante Pêter der hailige man; |
| 3765 | er sprach: ‘nû scône dîner wizze. |
| 3766 | ain wîle scoltû sizzen, |
| 3767 | nehabe nehain ungebære: |
| 3768 | ih verende dir umbe die wîlsælde’. |
| 3769 | Duo sprach der alte man: |
| 3770 | ‘der rede wolt ih gern ain ende hân. |
| 3771 | doh enmac ih niht frô sîn: |
| 3772 | mir hât geswichen der sin mîn, |
| 3773 | daz ih sol sîn uberwunden |
| 3774 | von ainem kinde sus tumben. |
| 3775 | ih enmege mih des erhaln, |
| 3776 | ih enwil mih niemer mêr wol gehaben’. |
| 3777 | Duo sprach sancte Pêter der heilige man: |
| 3778 | ‘ih wil dir wærlîchen sagen: |
| 3779 | swer sich an die wîlsælde verlât. |
| 3780 | daz im dikke missegât, |
| 3781 | und wil dirz hie zestete bewæren’, |
| 3782 | sprach der bote mære. |
| 3783 | ‘Liebe, nû tuo alsô ih dih lêre: |
| 3784 | wel dir der aller besten maistere zwêne, |
| 3785 | die nû sîn in allem rîche, |
| 3786 | und nim den ainen tougenlîche |
| 3787 | in dîne |
| 3788 | und sprich, dir sî sô grôz herzelait |
| 3789 | in der wîle geschehen, |
| 3790 | daz dû gerne verwandeltest dîn leben, |
| 3791 | dir sî der lîp |
| 3792 | frâge in, ob iz der wîle scult wære: |
| 3793 | dû welles sîn gerne dâ ze im ain ende haben. |
| 3794 | sô haizet er im sîn buoch vur tragen, |
| 3795 | er zaiget dir vil manigen wunderlîchen sternen, |
| 3796 | und machet dir einen vil grôzzen |
| 3797 | er laitet dir den sternen hin und her, |
| 3798 | sîn houbet daz |
| 3799 | er sprichet, daz diu wîle wære |
| 3800 | in sô grôzzen unsælden, |
| 3801 | daz si menniske niemer mähte getragen: |
| 3802 | mit rehte muosestû lait haben. |
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| 3803 | Liebe, nû ist daz getân: |
| 3804 | nû lâ den sînen wec gân! |
| 3805 | sâ |
| 3806 | sô frâge aver den andern |
| 3807 | mit frôlîchem antluzze: |
| 3808 | sprich, dir wære diu selbe wîle sô nuzze, |
| 3809 | dir gescæhe in dirre werlte nie sô liebe. |
| 3810 | sô haizzet er im vil skiere |
| 3811 | sîn buoh dar bringen, |
| 3812 | sô zeiget er dir dar inne |
| 3813 | die sternen alsô wunderlîch, |
| 3814 | vil tiure vermizzet er sich, |
| 3815 | daz diu wîle wære |
| 3816 | in sô grôzen sælden, |
| 3817 | daz si mennisken niemer gebære dehain scaden: |
| 3818 | von rehte muosestû froude danne haben. |
| 3819 | sô hânt dir di maister baide gelogen, |
| 3820 | sô hât dih diu wîlsælde betrogen. |
| 3821 | Duo sprach der altman: |
| 3822 | ‘Pêter nû muoz ih dir durh nôt sagen, |
| 3823 | waz mir von der wîlsælde ist bekomen. |
| 3824 | sî ouh ih iemer ze allen êren |
| 3825 | nû was ih doh ze Rôme ain rîche man: |
| 3826 | ih nam ain wîp diu mir wol gezam. |
| 3827 | vil skiere gewan ih dâ bî |
| 3828 | êrlîcher sune drî, |
| 3829 | zwêne sant ih zu Athênas. |
| 3830 | vil unlange stuont daz, |
| 3831 | unz ih di muoter vant riwege, |
| 3832 | an die brust |
| 3833 | wainunde und clagende, |
| 3834 | michel nôt habende, |
| 3835 | si rief ze allen zîten sus: |
| 3836 | “lieber sun Faustînus! lieber sun Faustus!” |
| 3837 | diu muoter vuor nâh den kinden in daz lant. |
| 3838 | ih nefraiscte noh envant, |
| 3839 | war ir dehainez ie bekôme: |
| 3840 | ze lîbe oder ze tôde. |
| 3841 | mînem jungesten sun |
| 3842 | gab ih allen mînen rîhtuom, |
| 3843 | ih vuor nâh wîbe und nâh kinden: |
| 3844 | ih nemaht ir nehainez niemer mêr vinden. |
| 3845 | alsô var ih noh, daz ist wâr, |
| 3846 | mêr denne vierzehen jâr, |
| 3847 | daz ih den liuten kochete unde buoch, |
| 3848 | den |
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| 3849 | die |
| 3850 | Pêter, geloubest dû an di wîlsælde noch?’ |
| 3851 | diu kint erhôrten daz, |
| 3852 | daz der hêrre ir vater was, |
| 3853 | si wolten sih im eroffenet haben: |
| 3854 | daz verbôt in der heilige man; |
| 3855 | er hiez si wesen stille, |
| 3856 | unz iz wurde sîn wille. |
| 3857 | Duo sprach der hailige man: |
| 3858 | ‘nû sage mir dînes jungisten sunes namen!’ |
| 3859 | duo sprach der althêrre: |
| 3860 | ‘den sage ih dir vil gerne, |
| 3861 | want in der werlt nie nehain man |
| 3862 | lieber kint im gewan, |
| 3863 | âlsô lange iz diu wîle |
| 3864 | daz ih si haben scolte. |
| 3865 | der eltiste hiez Faustînus, |
| 3866 | der dar nâh hiez Faustus, |
| 3867 | Clêmens mîn jungister sun hiez, |
| 3868 | dem ih allez mîn erbe liez’. |
| 3869 | Duo antwurte im sus |
| 3870 | der heilige apostolus: |
| 3871 | ‘nû ob daz sô mach komen, |
| 3872 | daz ih dir zeige dîne |
| 3873 | mit dînen drin sun, |
| 3874 | waz wil dû denne umbe die wîlsælde tuon? |
| 3875 | vil kûske und vil raine |
| 3876 | ân alle bôse maile’. |
| 3877 | Duo sprach der alte: |
| 3878 | ‘Pêter, tuo die rede |
| 3879 | alsô vil mag ih kint oder wîp iemer mêr gesehen, |
| 3880 | sam ûzerhalp der wîlsælde iemer iht mac gescehen’. |
| 3881 | Duo antwurte im sus |
| 3882 | der hailige apostolus: |
| 3883 | ‘wil dû an ain wâren got gelauben haben? |
| 3884 | der wîlsælde widersagen? |
| 3885 | ih antwurte dir hie zestet dîn wîp, |
| 3886 | der dû gedarbet hâst manige zît’. |
| 3887 | Duo sprach der altman: |
| 3888 | ‘ih wil der wîlsælde widersagen, |
| 3889 | maht dû daz getuon, |
| 3890 | daz ih ersehe dehain mînen sun; |
| 3891 | mahte ih denne daz wîp gesehen, |
| 3892 | Pêter, sô wolt ih dir der wârhaite jehen’. |
| 3893 | Der wâre gotes wîgant, |
| 3894 | er nam die frowen bî der hant, |
| 3895 | sînen jungisten sun Clêmentem |
| 3896 | den hiez er aller êrist vur gên. |
| 3897 | sancte Pêter inalmitten duo gestuont, |
| 3898 | dem liute tet er offenlîche kunt: |
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| 3899 | den hêrren den si armen sæhen, |
| 3900 | wie grôz rihtær er dâ ze Rôme wære. |
| 3901 | er eroffente elliu sîniu dinc |
| 3902 | umbe wîp und umbe kint, |
| 3903 | er sagete von allen ir nôten, |
| 3904 | die si erliten hêten. |
| 3905 | Duo sprach der hailige apostolus: |
| 3906 | ‘hie ist Faustînus unde Faustus!’ |
| 3907 | diu kint hiez er dar vur gân. |
| 3908 | do erblaichete der alte man, |
| 3909 | er begunde nider |
| 3910 | des lebenes gezwîvelen, |
| 3911 | des âtmen im zeran. |
| 3912 | duo segent in der hailige man, |
| 3913 | er hiez in gesunt ûf rihten, |
| 3914 | er kom wider ze sînen chreften. |
| 3915 | ê was er verwandelôt, |
| 3916 | daz in genuoge wânden tôt, |
| 3917 | sîn lîp was im swære, |
| 3918 | sam er in ainem swæren troume læge. |
| 3919 | alsô im sancte Pêter zuo sprach, |
| 3920 | wîe frôlîche er allenthalben sîn sach |
| 3921 | an wîbe unde an kinden |
| 3922 | und an andern den gesinden! |
| 3923 | zesamene si duo giengen, |
| 3924 | ainander si enphiengen |
| 3925 | mit sô getâner wunne |
| 3926 | die mennisken zunge |
| 3927 | niemer gesagen nemach. |
| 3928 | daz was der frôl |
| 3929 | den si ie dâ vor gewunnen: |
| 3930 | des wolt in got gunnen. |
| 3931 | Duo si in aller grôzzisten frouden wâren |
| 3932 | und des gelouben |
| 3933 | die christenhait |
| 3934 | und die toufe enphiengen, |
| 3935 | Symôni dem gaukelære |
| 3936 | was ir froude vil swære. |
| 3937 | er nam sîner jungere zwêne, |
| 3938 | er sante si dar bêde: |
| 3939 | ainer hiez Âgon, |
| 3940 | der ander Anûbîon. |
| 3941 | die kômen zu dem alten Faustinjânô, |
| 3942 | si sprâchen zuo im dô: |
| 3943 | ‘Corneljus ist von Rôme komen, |
| 3944 | er hât dîn froude wol vernomen, |
| 3945 | wie dir dîn dinch komen ist, |
| 3946 | nû lobet er verre den hailigen Christ, |
| 3947 | er sprichet dich gerne hie bî — |
| 3948 | und verhil iz dîne sune alle drî’. |
| 3949 | Duo sprach der althêrre: |
| 3950 | ‘daz laist ih allez gerne’. |
| 3951 | vil tougenlîchen îlter dô, |
| 3952 | er sprach zu dem hailigen apostolô: |
| 3953 | ‘maister, dû solt mir urloup geben, |
| 3954 | ih wolte gerne ainen mînen friunt sehen: |
| 3955 | Corneljus ist chomen in daz lant |
| 3956 | unt hât mir sînen poten gesant: |
| 3957 | mih |
| 3958 | ih kome dir noh her wider vor naht’. |
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| 3959 | Duo sprach der heilige man: |
| 3960 | wie wol ih dir sîn gan! |
| 3961 | guoten friunt alten |
| 3962 | sol man wol behalten. |
| 3963 | nû var daz dîn got phlege |
| 3964 | und enkêre niender ûz dem wege, |
| 3965 | sunder dû dih versinnest unde verstâst, |
| 3966 | waz dû |
| 3967 | Alsô der althêrre dar kom, |
| 3968 | wol enphiench in Sŷmon, |
| 3969 | er wânde allez zewâre, |
| 3970 | daz iz Corneljus wære. |
| 3971 | er bat in zuo im sizzen, |
| 3972 | er verwandelôt im sîn antluzze. |
| 3973 | Duo si duo geredeten |
| 3974 | aldaz si wolten, |
| 3975 | der gaukelære urloup nam, |
| 3976 | frô schiet der hêrre dan. |
| 3977 | alsô was er betrogen. |
| 3978 | du er haim under die sîne kom, |
| 3979 | unde er an sîne stat gesaz, |
| 3980 | alsô er dâ vor gewon was, |
| 3981 | diu frowe in an saeh, |
| 3982 | vil zornlîchen si im zuo sprach: |
| 3983 | ‘disses |
| 3984 | jâ hân ih ain vil lieben man. |
| 3985 | wi getarstu zu mir gesizzen? |
| 3986 | dû |
| 3987 | want ih unchûske nie niht gephlac. |
| 3988 | vil schiere rûme dû die stât! |
| 3989 | alle die duo jâhen, |
| 3990 | die Sŷmônem ie gesâhen, |
| 3991 | daz er wære |
| 3992 | Sŷmon der gaukelære. |
| 3993 | unt swer aver Sŷmônem ie gesah, |
| 3994 | daz der vur wâr jah, |
| 3995 | daz er wære |
| 3996 | Faustinjânus der Rômære’. |
| 3997 | Duo sprach sancte Pêter der hailige man: |
| 3998 | ‘iz ist wærlîchen, frowe, dîn man, |
| 3999 | du erkenne in an der stimme! |
| 4000 | ih pin wol worden innen: |
| 4001 | er was ze dem koukelære komen, |
| 4002 | er hât im sîn antluzze genomen; |
| 4003 | daz er wânde daz Corneljus wære, |
| 4004 | daz was Sŷmon der |
| 4005 | mahter iz |
| 4006 | er wolte unser froude gerne betruoben’. |
| 4007 | Diu kint erhôrten daz, |
| 4008 | wie der vater betrogen was: |
| 4009 | si fielen ihr maister ze fuozen, |
| 4010 | si bâten in, daz si geniezen muosen, |
| 4011 | daz er ouh des gedæhte, |
| 4012 | wie er si zesamene bræhte: |
| 4013 | wainende unde chlagende, |
| 4014 | michel nôt habende. |
| 4015 | ûf stuont der heilige man, |
| 4016 | er hiez den althêrren dar vur gân, |
| 4017 | daz crûce er uber in tet: |
| 4018 | gesunt wart er an der stet, |
| 4019 | daz antluzze verwandelte sih widere. |
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| 4020 | er wîset in an sîn alt |
| 4021 | er gab in der frowen bî der hant. |
| 4022 | duo lobeten den hailant |
| 4023 | alle die dâ wâren, |
| 4024 | wande si diu grôzen zaichen sâhen. |
| 4025 | Faustinjânum und sîn wîp |
| 4026 | di dûhte duo michel zît, |
| 4027 | daz si ir maister ladeten, |
| 4028 | von dem si habeten |
| 4029 | froude unde êre. |
| 4030 | si bâten den hêrren, |
| 4031 | daz er vuore ze Rôme. |
| 4032 | der gotes bote frône, |
| 4033 | er gewerte si dô: |
| 4034 | des wurden si allesamt vil frô. |
| 4035 | si vuoren ze Rôme in die stat, |
| 4036 | allez sîn erbe er im gap, |
| 4037 | si lebeten gaistlîche, |
| 4038 | Claudîus richte daz rîche. |
| 4039 | Sŷmon der koukelære wart des gewar. |
| 4040 | vil schiere huob er sih nâh in dar, |
| 4041 | er |
| 4042 | iz ergie in sît baiden ubele. |
| 4043 | Sancte Pêter huop die gotes lêre: |
| 4044 | daz zurnde der kaiser sêre. |
| 4045 | vil manigen er gelêrte, |
| 4046 | daz er sich ze gote kêrte; |
| 4047 | die tôten hiez er ûf stên, |
| 4048 | die miselsuht ab gên. |
| 4049 | die dâ lagen an der |
| 4050 | mit gewalt er si ûf rihte. |
| 4051 | die liute wurden sancte Pêteres gewar: |
| 4052 | alsô verre sô sîn scate bar, |
| 4053 | die wurden alle an der stunt |
| 4054 | von allem ir siechtuom gesunt. |
| 4055 | Sŷmon der gotes widerwarte, |
| 4056 | sancte Pêtern muot er dikke harte. |
| 4057 | den hêrren er dikke an louc, |
| 4058 | den kunic er ofte betrouc, |
| 4059 | er flouch ingegen dem himele, |
| 4060 | er verwandelte sîn pilede |
| 4061 | unt lie daz den kunic sehen. |
| 4062 | daz liut begunde im allez jehen, |
| 4063 | daz si nie gesæhen |
| 4064 | nehainen got sô mæren, |
| 4065 | der in sô wol geviele. |
| 4066 | daz verwandelte got selbe schiere. |
| 4067 | Do der hêrre Faustinjânus verschiet, |
| 4068 | Sŷmon der gaukelære geriet |
| 4069 | dem kaiser Claudîô, |
| 4070 | daz er dem hailigen apostolô |
| 4071 | verbute ze Rôme die stat, |
| 4072 | want er im nie holt wart. |
| 4073 | Daz zurnden Rômære, |
| 4074 | daz der kaiser dem gaukelære |
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| 4075 | gevolget alsô verre. |
| 4076 | in |
| 4077 | er |
| 4078 | si rieten im an den lîp. |
| 4079 | Daz rîche hêt er vur wâr |
| 4080 | rehte driuzehen jâr |
| 4081 | und ehte mânode mêre: |
| 4082 | mit |